अवैध घुसपैठ पर केंद्र सख्त: जनसंख्या बदलाव की जांच के लिए हाई-लेवल कमेटी गठित

MHA ने जारी किया प्रस्ताव; एक साल में रिपोर्ट देगी समिति, देशभर में ‘डेमोग्राफिक बदलाव’ का वैज्ञानिक अध्ययन

नई दिल्ली 

केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने देश में जनसंख्या संरचना में हो रहे बदलावों की जांच के लिए “हाई-लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंजेज (HLCDC)” के गठन का प्रस्ताव जारी किया है। यह समिति अवैध प्रवासन (इलीगल इमिग्रेशन) और अन्य असामान्य कारणों से हो रहे जनसंख्या बदलावों का वैज्ञानिक अध्ययन करेगी।

सरकार के अनुसार, देश के कई क्षेत्रों—खासकर सीमावर्ती जिलों—में जनसंख्या के पैटर्न में ऐसे बदलाव देखे गए हैं, जिन्हें सामान्य जन्म-मृत्यु दर से नहीं समझा जा सकता। इन बदलावों के पीछे अवैध घुसपैठ, असामान्य बसावट और अनियमित जनसंख्या गतिशीलता को कारण माना जा रहा है।

एक साल में देनी होगी रिपोर्ट
गृह मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, यह समिति एक वर्ष के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। समिति का मुख्यालय नई दिल्ली में होगा और इसके संचालन के लिए प्रशासनिक व लॉजिस्टिक सहायता MHA उपलब्ध कराएगा।

रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज करेंगे नेतृत्व
इस उच्चस्तरीय समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर करेंगे। इसके अन्य सदस्यों में जनगणना आयुक्त, पूर्व IAS अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, पूर्व IPS अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और अर्थशास्त्री डॉ. शामिका रवि शामिल हैं।

क्या होंगे समिति के प्रमुख कार्य
सरकार ने समिति को कई अहम जिम्मेदारियां सौंपी हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • जनसंख्या बदलाव के कारणों और प्रभावों का व्यापक अध्ययन
  • अवैध प्रवासन और असामान्य बसावट के पैटर्न की पहचान
  • सामाजिक व धार्मिक समुदायों में हो रहे बदलावों का विश्लेषण
  • अवैध प्रवासियों की पहचान, निरोध और निष्कासन के लिए कानूनी ढांचा सुझाना
  • केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के लिए नीति तैयार करना

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा
केंद्र सरकार का मानना है कि यह मामला केवल जनसंख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर राष्ट्रीय सुरक्षा, संसाधनों के वितरण, प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक संतुलन पर भी पड़ रहा है।

देशव्यापी प्रभाव की चिंता
गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि पहले जहां यह समस्या सीमावर्ती इलाकों तक सीमित थी, अब इसका असर शहरी क्षेत्रों, औद्योगिक कॉरिडोर और आदिवासी क्षेत्रों तक फैल चुका है, जिससे शासन व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है।

 

IANS – Pic Credit

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