“भारत-न्यूज़ीलैंड के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, व्यापार और निवेश को मिलेगा बड़ा बढ़ावा”

नई दिल्ली। भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच लंबे इंतजार के बाद बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर हो गए हैं, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। यह समझौता करीब एक दशक की बातचीत के बाद अंतिम रूप तक पहुंचा है।

इस समझौते के तहत भारत को अपने अधिकांश निर्यात पर न्यूज़ीलैंड में शून्य शुल्क (ड्यूटी-फ्री) पहुंच मिलेगी, जिससे वस्त्र, इंजीनियरिंग, चमड़ा और समुद्री उत्पाद जैसे क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

वहीं, न्यूज़ीलैंड को भी भारत के बाजार में व्यापक पहुंच मिलेगी, जिसमें उसके लगभग 95 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क में कटौती या समाप्ति शामिल है।

समझौते का एक अहम पहलू सेवाओं और रोजगार के अवसरों को बढ़ाना है। इसके तहत आईटी, शिक्षा, पर्यटन और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा। साथ ही, भारतीय पेशेवरों के लिए हर साल करीब 5,000 वीज़ा का प्रावधान किया गया है, जिससे रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

इस FTA के जरिए अगले 15 वर्षों में लगभग 20 अरब डॉलर के निवेश आने की संभावना जताई जा रही है, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और द्विपक्षीय व्यापार में तेज़ी आएगी।

हालांकि, भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों—खासकर डेयरी और कृषि—को सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्रावधान भी किए हैं, ताकि घरेलू किसानों पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

 

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