हर नागरिक को समयबद्ध और सस्ता न्याय मिले: उपराष्ट्रपति की अपील
नई दिल्ली, प्रतिनिधि।
उपराष्ट्रपति ने देश में न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी, सुलभ और किफायती बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि न्याय तभी सार्थक है जब वह हर नागरिक तक समय पर और कम खर्च में पहुंचे।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने अदालतों में लंबित मामलों और न्याय मिलने में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के बराबर है, इसलिए इसे तेज और सरल बनाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि न्यायिक प्रक्रिया की बढ़ती लागत आम लोगों के लिए बड़ी बाधा बन रही है। ऐसे में जरूरी है कि न्याय प्रणाली को आम आदमी के अनुकूल बनाया जाए, ताकि हर वर्ग के लोग बिना आर्थिक दबाव के न्याय प्राप्त कर सकें।
उपराष्ट्रपति ने सुझाव दिया कि न्यायालयों में लंबित मामलों को कम करने, तकनीक के बेहतर उपयोग और वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। साथ ही न्यायिक ढांचे को मजबूत करने और रिक्त पदों को शीघ्र भरने की भी आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि देश की न्याय व्यवस्था में सुधार लाकर ही संविधान के मूल उद्देश्यों—न्याय, स्वतंत्रता और समानता—को सही मायनों में लागू किया जा सकता है।