सिविल सेवा परीक्षा नियम समय-समय पर बदल रहे हैं, सरकार ने लोकसभा में बताया
नई दिल्ली, 4 फरवरी 2026: केंद्रीय सरकार ने बुधवार को लोकसभा में बताया कि सिविल सेवा परीक्षा के नियम एक विकसित होते ढाँचे का हिस्सा हैं और इन्हें समय-समय पर सुधार व संशोधन के लिए समीक्षा किया जाता है। इसका उद्देश्य देशभर के परीक्षा अभ्यर्थियों के लिए एक समान अवसर सुनिश्चित करना है।
केंद्रीय राज्य मंत्री (पर्सनल) डॉ. जितेंद्र सिंह ने संसद में लिखित उत्तर में बताया कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित होने वाली सिविल सेवा परीक्षा में नियम लगातार विकसित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह परीक्षा तीन चरणों — प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार — में आयोजित की जाती है, जिससे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS), भारतीय विदेश सेवा (IFS) सहित अन्य सेवाओं के अधिकारियों का चयन होता है।
जब लोकसभा में यह प्रश्न उठाया गया कि क्या लद्दाख के उम्मीदवारों को सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा में भारतीय भाषा पेपर से छूट दी जा सकती है, तो मंत्री ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सीएसई नियम-2025 के अनुसार भारतीय भाषा पेपर उन उम्मीदवारों के लिए अनिवार्य नहीं है जो अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और सिक्किम जैसे पूर्वोत्तर राज्यों से आते हैं। लेकिन लद्दाख के लिए इसी तरह की छूट को लेकर कोई तत्काल घोषणा नहीं की गई है।
सरकार ने यह भी बताया कि नियमों में संशोधन और सुधार सुनिश्चित करने का कार्य जारी है ताकि परीक्षा प्रक्रिया सभी वर्गों के लिए न्यायसंगत और पारदर्शी बनी रहे।