देशभर में 12 फरवरी को “भारत बंद” का ऐलान  मजदूर, किसान और ट्रेड यूनियन सड़कों पर

नई दिल्ली: देश की केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और प्रमुख किसान संगठनों ने 12 फ़रवरी 2026 (गुरुवार) को राष्ट्रव्यापी “भारत बंद” का आह्वान किया है, जिसका उद्देश्य केंद्र सरकार की श्रम सुधार नीतियों, नए श्रम कोडों और हालिया आर्थिक फैसलों के खिलाफ विरोध जताना है। इस बंद में करोड़ों मजदूरों और किसानों के भाग लेने की उम्मीद है, जिससे दैनिक जीवन पर व्यापक असर पड़ सकता है।

ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच में शामिल दस प्रमुख संगठन, जिनमें सीआईटीयू, एआईटीयूसी, आईएनटीयूसी जैसे यूनियन शामिल हैं, ने मजदूरों के रोजगार सुरक्षा, न्यूनतम वेतन, नौकरी की स्थिरता और अन्य श्रमिक-हित वाले मुद्दों पर सरकार से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के कारण यह हड़ताल बुलायी है।

किसान संगठनों, विशेषकर समयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने भी इस बंद का समर्थन किया है और आरोप लगाया है कि हालिया भारत-अमेरिका व्यापार समझौता और नीतियाँ भारतीय किसानों के हितों के विपरीत हैं तथा सस्ते अमेरिकी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में भारी प्रभाव डाल सकते हैं

जनजीवन पर असर: सेवाएँ प्रभावित, सुझाव

आयोजकों का दावा है कि इस बंद में करीब 30 करोड़ से अधिक मजदूर हिस्सा ले सकते हैं, जिससे कई क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएँ, सार्वजनिक परिवहन, सरकारी कार्यालय, बाजार और सड़क सेवाएँ प्रभावित हो सकती हैं।

हालांकि, अस्पताल, आपात सेवाएँ और हवाई अड्डे सामान्य रूप से कार्यरत रहने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन बैंक, सरकारी कार्यालय, बाजार और परिवहन पर असर पड़ने की संभावना है। नागरिकों को अपनी यात्रा योजनाओं और जरूरी कामों को पहले या बाद में निपटाने की सलाह दी जा रही है।

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