TET अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षक संगठनों पर उठे सवाल, साझा मंच की मांग तेज

रिपोर्ट: अनिरुद्ध नारायण, इंटर्न (BAJMC)

नई दिल्ली/लखनऊ: शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद देशभर, विशेषकर उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के बीच नई बहस शुरू हो गई है। कोर्ट द्वारा शिक्षकों को एक वर्ष की राहत दिए जाने के बावजूद, अब शिक्षकों का आक्रोश शासन या न्यायपालिका के बजाय शिक्षक संगठनों और उनके नेतृत्व की ओर केंद्रित हो गया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, खासकर व्हाट्सएप समूहों में, शिक्षक खुलकर संगठनात्मक रणनीति और नेतृत्व की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। शिक्षकों का आरोप है कि वर्षों से TET जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर अलग-अलग संगठन आंदोलन, ज्ञापन और बैठकें करते रहे, लेकिन कभी भी सभी संगठनों ने मिलकर एक साझा और प्रभावी रणनीति तैयार नहीं की।

शिक्षक समुदाय का मानना है कि संगठनों के बीच समन्वय की कमी के कारण इस गंभीर मुद्दे का समाधान अपेक्षित गति से नहीं हो सका। कई शिक्षकों ने यह भी कहा कि यदि सभी संगठन एकजुट होकर रणनीतिक रूप से कार्य करते, तो न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते थे।

व्हाट्सएप समूहों में वायरल हो रही प्रतिक्रियाओं में बड़ी संख्या में शिक्षकों ने मांग की है कि भविष्य में ऐसे महत्वपूर्ण मामलों के लिए सभी शिक्षक संगठन एक साझा मंच का गठन करें। उनका कहना है कि एकजुटता के साथ आवाज उठाने से न केवल मुद्दों को मजबूती मिलेगी, बल्कि समाधान भी तेजी से संभव हो सकेगा।

शिक्षक समुदाय के एक वर्ग का यह भी मानना है कि अब समय आ गया है जब व्यक्तिगत संगठनात्मक हितों से ऊपर उठकर सामूहिक नेतृत्व और साझा रणनीति को प्राथमिकता दी जाए। यही कारण है कि ‘साझा मंच’ की मांग अब तेज होती जा रही है।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या शिक्षक संगठन इस बढ़ते दबाव को समझते हुए एकजुटता की दिशा में कदम बढ़ाते हैं या नहीं।

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