परमाणु कार्यक्रम पर अड़ा उत्तर कोरिया, बातचीत से किया साफ इनकार
अनिरुद्ध नारायण, इंटर्न
प्योंगयांग/अंतरराष्ट्रीय डेस्क:
उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार की बातचीत या समझौते के लिए तैयार नहीं है। देश की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम “सौदेबाजी का साधन नहीं” बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए अनिवार्य है।
उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया के हवाले से कहा गया कि परमाणु हथियारों को बातचीत के जरिए छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता। यह भी दोहराया गया कि इन हथियारों का उद्देश्य किसी भी बाहरी खतरे का मुकाबला करना है और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से अमेरिका और उसके सहयोगी देश, लगातार उत्तर कोरिया पर परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए दबाव बना रहे हैं। इसके बावजूद प्योंगयांग ने साफ कर दिया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखेगा और इसे अपने रक्षा तंत्र का अहम हिस्सा मानता है।
हाल के महीनों में उत्तर कोरिया ने यह भी संकेत दिए हैं कि उसका परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र का दर्जा “अपरिवर्तनीय” है और किसी भी बाहरी दबाव से इसमें बदलाव नहीं होगा।
इस रुख से साफ है कि कोरियाई प्रायद्वीप में परमाणु मुद्दे पर तनाव कम होने की संभावना फिलहाल बेहद कम है, और आने वाले समय में वैश्विक कूटनीति के लिए यह एक बड़ी चुनौती बना रह सकता है।