बिहार में अब पेपरलेस होगी जमीन की रजिस्ट्री, 75+ बुजुर्गों को घर बैठे निबंधन की सुविधा

पटना: बिहार सरकार ने भूमि निबंधन की प्रक्रिया को अधिक सरल, सुरक्षित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य में Home Registry Digital System के तहत डिजिटल और पेपरलेस निबंधन व्यवस्था लागू की गई है। इसके जरिए जमीन की रजिस्ट्री से जुड़ी कागजी प्रक्रिया को कम करते हुए ऑनलाइन सत्यापन, डिजिटल रिकॉर्ड और तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 11 जुलाई 2026 को वैशाली (हाजीपुर) जिला निबंधन कार्यालय में इस नई व्यवस्था के तहत चार प्रमुख सेवाओं—होम रजिस्ट्रेशन, भूमि संबंधी ऑनलाइन जांच, पेपरलेस निबंधन और GIS तकनीक से स्थल निरीक्षण—का शुभारंभ किया था। इसी अवसर पर 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट की शुरुआत की गई। बाद में इसकी आयु सीमा घटाकर 75 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिकों के लिए घर बैठे निबंधन की सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की गई।

पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल और पेपरलेस

नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य जमीन की रजिस्ट्री में कागजी औपचारिकताओं को न्यूनतम करना है। दस्तावेजों के डिजिटल प्रबंधन, ऑनलाइन सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्ड के इस्तेमाल से निबंधन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जा रही है।

निबंधन विभाग की मौजूदा ऑनलाइन व्यवस्था में दस्तावेजों की सॉफ्ट कॉपी अपलोड करने, निबंधन कार्यालय में उपस्थिति के लिए ऑनलाइन समय और तारीख लेने तथा निबंधित दस्तावेज की सॉफ्ट कॉपी डाउनलोड करने जैसी सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं। नई पेपरलेस व्यवस्था इसी डिजिटल सिस्टम को और व्यापक बनाएगी।

जमीन खरीदने से पहले ऑनलाइन जांच

पेपरलेस निबंधन प्रणाली में जमीन की खरीद-बिक्री से पहले उसकी स्थिति की ऑनलाइन जांच पर विशेष जोर दिया गया है। GIS तकनीक और ऑनलाइन सत्यापन के जरिए संबंधित भूमि की उपलब्ध डिजिटल जानकारी और स्थल संबंधी विवरण की पुष्टि करने में मदद मिलेगी।

इससे खरीदारों को जमीन से जुड़ी जानकारी अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से मिल सकेगी। सरकार का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड और स्थल संबंधी जानकारी के बेहतर सत्यापन से गलत या भ्रामक जानकारी के आधार पर होने वाले लेन-देन की संभावना कम होगी और भूमि विवादों को रोकने में भी मदद मिलेगी।

GIS तकनीक से होगा स्थल निरीक्षण

निबंधन प्रक्रिया में Geographic Information System (GIS) तकनीक का इस्तेमाल जमीन के स्थल संबंधी विवरण के सत्यापन के लिए किया जा रहा है। GIS के माध्यम से भूमि की लोकेशन और उपलब्ध डिजिटल जानकारी को तकनीकी रूप से जोड़ा जा सकेगा।

इससे भूमि लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाने और खरीदारों के हितों की सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

75 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को घर बैठे रजिस्ट्री

वरिष्ठ नागरिकों के लिए सरकार ने विशेष सुविधा शुरू की है। शुरुआत में 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों को होम रजिस्ट्रेशन की सुविधा दी गई थी। अब इसकी आयु सीमा घटाकर 75 वर्ष से अधिक कर दी गई है।

पात्र वरिष्ठ नागरिकों को निबंधन कार्यालय जाने की जरूरत कम होगी और मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट के जरिए घर पर ही निबंधन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे उम्र या शारीरिक असुविधा के कारण कार्यालय आने-जाने में परेशानी झेलने वाले बुजुर्गों को बड़ी राहत मिलेगी।

WhatsApp और ई-मेल से मिलेंगे दस्तावेज

डिजिटल निबंधन व्यवस्था में निबंधन से जुड़े दस्तावेजों को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार के अनुसार निबंधित दस्तावेज WhatsApp और ई-मेल के जरिए भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

इससे नागरिकों को दस्तावेज लेने के लिए बार-बार निबंधन कार्यालय जाने की जरूरत कम होगी और डिजिटल रिकॉर्ड तक उनकी पहुंच आसान होगी।

कम होंगे निबंधन कार्यालय के चक्कर

पेपरलेस निबंधन का प्रमुख उद्देश्य नागरिकों के समय और श्रम की बचत करना है। डिजिटल प्रक्रिया के जरिए आवेदन, दस्तावेजों की प्रक्रिया, सत्यापन और निबंधन से जुड़े विभिन्न चरणों को अधिक सुव्यवस्थित किया जा रहा है।

नई व्यवस्था से:

  • कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम होगी।
  • निबंधन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।
  • अनावश्यक कार्यालय चक्कर कम होंगे।
  • डिजिटल रिकॉर्ड का रखरखाव आसान होगा।
  • नागरिकों को दस्तावेजों की डिजिटल पहुंच मिलेगी।
  • भूमि लेन-देन में तकनीकी सत्यापन को बढ़ावा मिलेगा।
  • 75 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को घर बैठे निबंधन की सुविधा मिलेगी।
  • भूमि खरीदारों के हितों की सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिलेगी।

बिहार में डिजिटल भूमि सेवाओं का विस्तार

पेपरलेस निबंधन व्यवस्था को राज्य में चल रही डिजिटल भूमि प्रशासन प्रणाली से भी जोड़ा जा रहा है। बिहारभूमि पोर्टल के माध्यम से नागरिकों को डिजिटल हस्ताक्षरित भू-अभिलेख, ऑनलाइन दाखिल-खारिज, ऑनलाइन भू-लगान भुगतान, राजस्व न्यायालय, ई-मापी, भूमि उपयोग परिवर्तन, राजस्व मानचित्रों की डोर-स्टेप डिलीवरी, LPC, जमाबंदी, भू-नक्शा, मोबाइल/आधार सीडिंग और विशेष सर्वेक्षण जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इस तरह निबंधन, भूमि रिकॉर्ड और राजस्व सेवाओं के डिजिटलीकरण को एक-दूसरे से जोड़कर बिहार में समग्र डिजिटल भूमि प्रशासन व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

सुरक्षित और पारदर्शी भूमि लेन-देन पर जोर

जमीन आम नागरिकों की सबसे महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों में से एक है। ऐसे में भूमि के स्वामित्व, रिकॉर्ड, स्थल और निबंधन से जुड़ी जानकारी को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सरकार का लक्ष्य है कि तकनीक के इस्तेमाल से भूमि निबंधन को कम कागज, कम समय, कम कार्यालय चक्कर और अधिक पारदर्शिता वाली सेवा बनाया जाए। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पेपरलेस निबंधन प्रणाली को डिजिटल बिहार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए सरकारी सेवाओं को नागरिकों के लिए सरल, सुरक्षित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर जोर दिया है।

बिहार में पेपरलेस निबंधन की यह पहल पारंपरिक कागजी प्रक्रिया को डिजिटल व्यवस्था में बदलने के साथ-साथ भूमि लेन-देन को अधिक सुविधाजनक और भरोसेमंद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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