पटना में पीएचडी धारकों का लोकभवन मार्च, पुलिस ने रोका; छात्रों के समर्थन में उतरे कई दल

पटना। बिहार में पीएचडी धारकों और शोधार्थियों की मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन अब राजनीतिक रंग लेने लगा है। ऑल पीएचडी होल्डर्स एंड रिसर्च स्कॉलर्स एसोसिएशन ऑफ बिहार के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने पटना में लोकभवन की ओर मार्च निकालने की कोशिश की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। इससे पहले भी कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने गर्दनीबाग स्थित धरना स्थल पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया था।

नियुक्ति और डोमिसाइल नीति प्रमुख मांग

प्रदर्शनकारी पीएचडी धारकों और शोधार्थियों की प्रमुख मांग है कि विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति UGC Regulations 2018 और Table 3A के प्रावधानों के अनुरूप की जाए। इसके अलावा बिहार में डोमिसाइल नीति लागू करने, बिहार स्टैट्यूट 2026 की विसंगतियां दूर करने, गेस्ट शिक्षकों और शोधार्थियों की समस्याओं का समाधान करने तथा विश्वविद्यालयों में रिक्त असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर जल्द नियुक्ति की मांग की जा रही है।

आमरण अनशन पर हैं कुमुद पटेल

आंदोलन के दौरान एसोसिएशन के नेता कुमुद पटेल अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह आंदोलन केवल कुछ पदों पर नियुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार में उच्च शिक्षा, रोजगार के अवसर और शोधार्थियों के भविष्य से जुड़ा व्यापक मुद्दा है।

तेजस्वी समेत विपक्षी नेताओं ने दिया समर्थन

मंगलवार को RJD के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव, CPI(ML) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य, CPI के राष्ट्रीय सचिव गिरीश चंद्र शर्मा और कांग्रेस MLC मदन मोहन झा समेत कई नेताओं ने गर्दनीबाग पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की। तेजस्वी यादव ने मांगों को गंभीर और जायज बताते हुए सरकार से संवेदनशीलता के साथ समाधान निकालने की अपील की।

दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि शोधार्थियों और उच्च शिक्षा से जुड़े युवाओं की समस्याएं केवल व्यक्तिगत नियुक्ति का विषय नहीं हैं, बल्कि बिहार के शैक्षणिक भविष्य से जुड़ी हैं। कांग्रेस नेताओं ने भी सरकार से प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत कर समयबद्ध समाधान निकालने की मांग की।

आंदोलन पर राजनीति तेज

पीएचडी धारकों के आंदोलन को विपक्षी दलों का समर्थन मिलने के बाद बिहार में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। वहीं, राज्य में छात्रों और युवाओं से जुड़े अन्य आंदोलनों के बीच यह प्रदर्शन भी सरकार के लिए एक नई चुनौती बनता दिखाई दे रहा है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, सरकार के सामने उच्च शिक्षा में रिक्त पदों, गेस्ट शिक्षकों और शोधार्थियों से जुड़े मुद्दों पर जल्द समाधान निकालने की चुनौती है।

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