BRICS का नई दिल्ली घोषणापत्र जारी, आतंकवाद से लेकर पश्चिम एशिया और वैश्विक व्यापार पर अहम फैसले
नई दिल्ली। 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने शनिवार को नई दिल्ली घोषणापत्र को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी। 45 पन्नों और 140 बिंदुओं वाले इस घोषणापत्र में पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव, आतंकवाद, वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दों पर BRICS देशों ने अपना साझा रुख सामने रखा।
पश्चिम एशिया में तनाव पर जताई गंभीर चिंता
घोषणापत्र में पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव पर गहरी चिंता जताई गई। BRICS देशों ने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने का आह्वान किया, जिससे स्थिति और खराब हो सकती है। सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए संवाद, परामर्श और कूटनीति को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख
BRICS ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की कड़ी निंदा की। घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 के जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले की भी कड़े शब्दों में निंदा की गई, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत दोहराई।
एकतरफा टैरिफ और व्यापारिक पाबंदियों का विरोध
घोषणापत्र में एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों पर चिंता जताई गई। BRICS देशों के अनुसार ऐसी व्यापारिक बाधाएं वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित करती हैं। समूह ने अधिक खुले, निष्पक्ष और सहयोगात्मक वैश्विक व्यापार की जरूरत पर जोर दिया।
ऊर्जा सुरक्षा और हरित बदलाव पर जोर
BRICS देशों ने ऊर्जा क्षेत्र में न्यायसंगत, व्यवस्थित, समान और समावेशी ऊर्जा बदलाव का समर्थन किया। घोषणापत्र में कहा गया कि उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में जीवाश्म ईंधन अभी भी ऊर्जा मिश्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, जलविद्युत, हाइड्रोजन और कम-कार्बन तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ाने की बात कही गई।
महत्वपूर्ण खनिजों और आपूर्ति श्रृंखला पर सहयोग
घोषणापत्र में महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच और उनकी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। BRICS देशों ने ऊर्जा बाजारों की स्थिरता और महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा को आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताया।
वैश्विक संस्थानों में सुधार की मांग
BRICS ने वैश्विक शासन व्यवस्था को आज की आर्थिक और राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने की जरूरत दोहराई। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व और भूमिका को बढ़ाने की मांग को भी घोषणापत्र में प्रमुखता मिली।
संवाद और कूटनीति को बताया समाधान
नई दिल्ली घोषणापत्र का व्यापक संदेश यह रहा कि मौजूदा वैश्विक संकटों का समाधान टकराव के बजाय संवाद, कूटनीति और बहुपक्षीय सहयोग के जरिए किया जाना चाहिए। भारत की अध्यक्षता में हुए सम्मेलन में BRICS ने ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने और वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया।