भारतीय वायुसेना को मिला नया प्रमुख, एयर चीफ मार्शल अशुतोष दीक्षित ने संभाली कमान; ‘VAYU’ विजन से बताए भविष्य के लक्ष्य
नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना को नया प्रमुख मिल गया है। एयर चीफ मार्शल अशुतोष दीक्षित ने 31 अक्टूबर 2026 को देश के 29वें वायुसेना प्रमुख (Chief of the Air Staff) के रूप में कार्यभार संभाल लिया। उन्होंने एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का स्थान लिया, जो 42 वर्षों की विशिष्ट सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं।
कार्यभार संभालने के बाद एयर चीफ मार्शल दीक्षित ने वायुसेना के भविष्य की रणनीति और प्राथमिकताओं को ‘VAYU’ विजन के माध्यम से सामने रखा। इसमें सैन्य तैयारियों को मजबूत करना, स्वदेशी रक्षा तकनीक को बढ़ावा देना, आधुनिक युद्धक रणनीति अपनाना और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना शामिल है।
क्या है ‘VAYU’ विजन?
एयर चीफ मार्शल दीक्षित ने वायुसेना की प्राथमिकताओं को चार प्रमुख स्तंभों में बांटा है।
- V – Vigilance and Readiness: हर समय सतर्कता और युद्ध के लिए तैयार रहना। वायुसेना की लड़ाकू क्षमता को स्वीकृत स्क्वाड्रन संख्या तक पहुंचाना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में है।
- A – Aatmanirbharta: रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता। तेजस, एएमसीए, स्वदेशी सेंसर और हथियार प्रणालियों को प्राथमिकता देना।
- Y – Yukti: रणनीतिक और तकनीकी नवाचार। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कमांड सिस्टम, ड्रोन रोधी तकनीक और आधुनिक युद्धक क्षमताओं का विकास।
- U – Unity of Effort: थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर समन्वय और संयुक्त अभियान की क्षमता बढ़ाना।
लड़ाकू स्क्वाड्रन की संख्या बढ़ाना बड़ी चुनौती
नए वायुसेना प्रमुख ने भारतीय वायुसेना की लड़ाकू क्षमता को स्वीकृत स्तर तक पहुंचाने को अपनी सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल किया है। उन्होंने कहा कि हर स्क्वाड्रन, रडार, एयर डिफेंस यूनिट और वायु योद्धा को किसी भी परिस्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार रहना चाहिए।
स्वदेशी हथियार और तकनीक पर जोर
दीक्षित ने कहा कि भारत को अपनी सैन्य जरूरतों के लिए स्वदेशी प्लेटफॉर्म, सेंसर और हथियार प्रणालियों को पर्याप्त संख्या में विकसित करना होगा। उन्होंने तेजस एमके-1ए, तेजस एमके-2 और एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) जैसे कार्यक्रमों को महत्वपूर्ण बताया।
उनके मुताबिक, मजबूत और विश्वसनीय वायु शक्ति केवल युद्ध जीतने के लिए ही नहीं, बल्कि संभावित संघर्ष को रोकने के लिए भी जरूरी है।
ड्रोन, AI और साइबर युद्ध की चुनौतियों पर नजर
नए वायुसेना प्रमुख ने कहा कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ड्रोन, लंबी दूरी के सटीक हथियार, अंतरिक्ष, साइबर क्षमता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम भविष्य की सैन्य चुनौतियों को प्रभावित करेंगे। ऐसे में वायुसेना को नई तकनीकों और रणनीतियों के अनुरूप खुद को लगातार तैयार करना होगा।
चार दशक का सैन्य अनुभव
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पूर्व छात्र अशुतोष दीक्षित को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। उनके पास 3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है। वह अनुभवी फाइटर पायलट, क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट हैं।
अपने लंबे सैन्य करियर में उन्होंने मिराज-2000, मिग विमानों, जगुआर और अन्य विमानों पर काम किया। वह ऑपरेशन सफेद सागर, ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन सिंदूर से भी जुड़े रहे हैं। वायुसेना में शीर्ष पद संभालने से पहले वह वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ के पद पर कार्यरत थे।
नए वायुसेना प्रमुख के सामने अब सैन्य आधुनिकीकरण, लड़ाकू विमानों की संख्या में बढ़ोतरी और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी है। ‘VAYU’ विजन के जरिए उन्होंने स्पष्ट किया है कि आने वाले वर्षों में भारतीय वायुसेना की तैयारी और तकनीकी क्षमता को नई ऊंचाई देना उनकी प्राथमिकता होगी।