भाजपा को चुनाव से पहले बड़ा झटका: विधायक मिश्रीलाल यादव की सदस्यता रद्द, दरभंगा कोर्ट से मिली थी दो साल की सजा
— संवाददाता, पटना

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। दरभंगा जिले के केवटी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे मिश्रीलाल यादव की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई है। बिहार विधानसभा सचिवालय ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है।

मिश्रीलाल यादव को दरभंगा के एक आपराधिक मामले में दोषी करार देते हुए अदालत ने दो वर्ष की सजा सुनाई थी, जिसके आधार पर उनकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो गई। यह मामला वर्ष 2019 का है, जिसकी सुनवाई के बाद अदालत ने 27 मई 2025 को उन्हें दोषी पाया और दो साल के कारावास की सजा सुनाई।

केवटी के समैला गांव से जुड़ा है पूरा मामला

मामले के अनुसार, 30 जनवरी 2019 को उमेश मिश्रा नामक व्यक्ति ने एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि 29 जनवरी की सुबह जब वे समैला गांव में टहल रहे थे, तभी कदम चौक के पास मिश्रीलाल यादव, सुरेश यादव और लगभग दो दर्जन अन्य लोगों ने उन्हें घेर लिया और गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर मिश्रीलाल ने फरसे से उमेश मिश्रा के सिर पर वार किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं, सुरेश यादव और अन्य ने लाठी-डंडे से हमला किया और उनकी जेब से 2300 रुपये भी निकाल लिए गए।

वीआईपी से भाजपा तक का सफर

गौरतलब है कि मिश्रीलाल यादव 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए की घटक दल विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) से जीतकर विधायक बने थे। हालांकि बाद में उन्होंने वीआईपी को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। पार्टी में शामिल होने के बाद वे भाजपा के सक्रिय नेता के रूप में कार्य कर रहे थे।

अब, सदस्यता रद्द होने के बाद भाजपा को न सिर्फ राजनीतिक छवि पर धक्का लगा है, बल्कि आगामी चुनावी रणनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है। इससे एनडीए गठबंधन को केवटी क्षेत्र में नए सिरे से समीकरण तैयार करने की चुनौती मिल सकती है।

क्या कहता है कानून?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 191 (1)(e) तथा जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 के अनुसार, यदि किसी विधायक को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है, तो वह विधानसभा सदस्यता के लिए अयोग्य हो जाता है। इसी आधार पर मिश्रीलाल की सदस्यता रद्द की गई है।

 

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