तेजस्वी का पीएम मोदी पर हमला: “हर दौरे में उड़ जाते हैं 100 करोड़, बिहार को सिर्फ जुमले मिलते हैं”
— संवाददाता, पटना
पटना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सिवान दौरे के दूसरे ही दिन बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एक तीखा हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री की बिहार यात्रा को “महंगा तमाशा” करार दिया और दावा किया कि हर दौरे में करीब 100 करोड़ रुपये बिहार की जनता की जेब से खर्च हो जाते हैं।
तेजस्वी ने कहा, “प्रधानमंत्री आते हैं, टेलीप्रॉम्पटर से घिसी-पिटी बातें पढ़कर चले जाते हैं। उनके भाषणों में कोई नया विजन नहीं होता, बस वही पुराने जुमले। बिहारियों को अब याद हो चला है—‘जुमलों का साया है, फिर देखो वही आया है।’”
“सरकारी कार्यक्रम में भी भगवा एजेंडा”
तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार और बिहार भाजपा पर सरकारी कार्यक्रमों में भी राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री आते हैं तो कार्यक्रम सरकारी होता है, लेकिन मंच और माहौल पूरी तरह भाजपा का दिखता है।
“भीड़ जुटाने के लिए लोगों को 500 रुपये दिए जाते हैं, सम्राट चौधरी जैसे नेताओं के लिए हेलीकॉप्टर से कई चक्कर लगाए जाते हैं—इन सबका खर्च बिहार की जनता ही उठाती है,” उन्होंने कहा।
“17 महीने में रीगा चीनी मिल चालू की, आपने क्या किया?”
तेजस्वी ने प्रधानमंत्री की विकास की बातों को खोखला बताते हुए कहा कि “पीएम मोदी ने बिहार के लिए एक भी वादा पूरा नहीं किया। वहीं, हमने सिर्फ 17 महीने में रीगा चीनी मिल फिर से शुरू कर दिखाई। ये काम होता है, जुमलेबाजी नहीं।”
उन्होंने यह भी कहा कि लालू यादव पर हमला करने वालों को अब यह समझना चाहिए कि जब देश में ट्रेनें चलती हैं, उनके पहिए बिहार में बनते हैं—यह लालू जी की नीति का ही नतीजा है। “आज बिहार का युवा, मज़दूर, किसान सब सवाल कर रहा है—‘प्रधानमंत्री आए तो क्या लाए?’” तेजस्वी ने पूछा।
“मोदी कथा सुना कर चले गए”
नेता प्रतिपक्ष ने तंज कसते हुए कहा, “प्रधानमंत्री अब केवल कथा सुना रहे हैं। विकास की नहीं, वादों की नहीं, बस भाषणों की कथा। बिहार का श्रमिक, छात्र, युवा—जिसने देश की नींव रखी—उसके भविष्य को कोई दिशा नहीं दी गई।”
“जमाई के सवाल पर क्यों चुप हैं पीएम?”
तेजस्वी ने बिना नाम लिए एक व्यक्तिगत हमला भी किया और सवाल किया, “प्रधानमंत्री अपने जमाइयों को लेकर चुप क्यों हैं? क्या ये भी पारदर्शिता का हिस्सा नहीं है? क्या सवाल पूछने का अधिकार अब जनता को नहीं है?”