विद्या भारती प्रचार विभाग की विभागीय बैठक संपन्न
सीताकुंड के सरस्वती विद्यालय में हुई शिक्षकों की विचारशील संगोष्ठी

मुंगेर, 23 जून — विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के अंतर्गत संचालित सरस्वती शिशु/विद्या मंदिरों के प्रचार विभाग की विभागीय स्तरीय बैठक सोमवार को दरियापुर, सीताकुंड स्थित सरस्वती शिशु/विद्या मंदिर परिसर में आयोजित की गई। बैठक में मुंगेर विभाग के विभिन्न विद्यालयों से आए आचार्यों ने प्रचार विभाग की भावी रणनीति और कार्यदिशा पर गहन मंथन किया।

कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की वंदना व पुष्पार्चन के साथ की गई। मंच पर प्रमुख रूप से क्षेत्रीय सहसंयोजक श्री संतोष कुमार, प्रांतीय सोशल मीडिया प्रमुख श्री आलोक कुमार सिन्हा, सहप्रमुख श्री सुजीत कुमार गुप्ता, मुंगेर जिला निरीक्षक श्री सतीश कुमार सिंह, विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष श्री शिवनंदन सलिल, सहसचिव श्री दिनकर प्रसाद सिंह, कोषाध्यक्ष श्री दिवाकर सिंह एवं विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री रणजीत कुमार सिंह उपस्थित रहे।

क्षेत्रीय सहसंयोजक श्री संतोष कुमार ने कहा कि “प्रचार विभाग संस्था की विचारधारा का संवाहक है। यह विभाग न केवल विचारों का संप्रेषण करता है, बल्कि समाज को दिशा देने में दीपस्तंभ की भूमिका निभाता है।”

वहीं प्रांतीय सोशल मीडिया प्रमुख श्री आलोक कुमार सिन्हा ने विद्यालयों से ई-पत्रिकाओं के नियमित प्रकाशन की अपील करते हुए उसकी संरचना और विषयवस्तु की जानकारी साझा की। सहप्रमुख श्री सुजीत कुमार गुप्ता ने डिजिटल माध्यमों के रचनात्मक उपयोग पर विस्तृत मार्गदर्शन देते हुए प्रचार की व्यापकता पर प्रकाश डाला।

मुंगेर जिला निरीक्षक श्री सतीश कुमार सिंह ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए प्रचार विभाग से जुड़े कार्यकर्ताओं से समयबद्ध और समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया। इस दौरान विद्यालय प्रबंधकारिणी के पदाधिकारियों ने भी विभाग की भूमिका को सराहते हुए अधिकाधिक सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता बताई।

प्रधानाचार्य श्री रणजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों का स्वागत करते हुए मंचस्थ अतिथियों को अंग वस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया। बैठक में उपस्थित शिक्षकों ने विचार-विमर्श में भाग लेकर विभाग की कार्ययोजना को नई ऊर्जा प्रदान की।

इस अवसर पर यह भी निर्णय लिया गया कि सभी विद्यालय अपनी गतिविधियों को जनसामान्य तक पहुंचाने के लिए प्रचार माध्यमों का समुचित प्रयोग करेंगे, जिससे संस्था की चेतनात्मक भूमिका और अधिक सशक्त बन सके।

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