गांजा मामलों में जमानत को लेकर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, कहा- ‘हम बहुत उदार हैं’
नई दिल्ली: गांजा से जुड़े मामलों में जमानत को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अहम टिप्पणी की। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा कि गांजा से जुड़े मामलों में आरोपी निचली अदालत से जमानत याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं। पीठ ने कहा, “जब गांजे की बात आती है तो हम बहुत उदार हैं।”
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल के एक व्यक्ति बिस्वनाथ मंडल की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आई। मंडल ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उसे गांजा बरामदगी से जुड़े मामले में अग्रिम जमानत देने से इनकार किया गया था।
मामला कूच बिहार के कोतवाली थाने में दर्ज शिकायत से जुड़ा है। याचिका के मुताबिक राजपुर इलाके के एक मकान से 252.330 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया था। मंडल ने दावा किया है कि तलाशी और बरामदगी के समय वह मौके पर मौजूद नहीं था और उसके पास से कोई मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ। उसने उस मकान पर अपने स्वामित्व या कब्जे के दावे को भी चुनौती दी है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि मामले में मंडल के खिलाफ प्रत्यक्ष बरामदगी, उसका कोई बयान या ऐसा स्वतंत्र साक्ष्य सामने नहीं आया है, जिससे उसे कथित मादक पदार्थ की जानकारी के साथ कब्जे या तस्करी से जोड़ा जा सके। मंडल ने यह भी दलील दी है कि मामले में सह-आरोपी उसकी दूसरी पत्नी को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी है।
मंडल ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका के जरिए हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए अंतरिम राहत की भी मांग की है। मामले में एनडीपीएस एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे मामलों में जमानत के कानूनी पहलुओं पर सुनवाई के दौरान आई है। हालांकि, किसी आरोपी को जमानत दिया जाना संबंधित मामले के तथ्यों, आरोपों और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करता है।
Report by – Shivanshu Singh Satya