ग्रेट निकोबार परियोजना पर कांग्रेस के ‘रेड फ्लैग’, संसद में बहस की मांग तेज

नई दिल्ली, (समाचार ब्यूरो):
ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे संसद में चर्चा के लिए लाने की मांग की है। पार्टी ने इस परियोजना से जुड़े पर्यावरण, आदिवासी अधिकार, पारदर्शिता और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चिंता जताई है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के हालिया ग्रेट निकोबार दौरे के बाद सरकार “डैमेज कंट्रोल मोड” में दिखाई दे रही है, लेकिन उसने मूल मुद्दों पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया।

पार्टी ने आरोप लगाया कि यह परियोजना पारिस्थितिक रूप से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में विकसित की जा रही है। प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट पोर्ट के लिए चुना गया गलाथिया बे क्षेत्र कोस्टल रेगुलेशन ज़ोन के अंतर्गत आता है, जहां इस तरह के निर्माण पर सामान्यतः प्रतिबंध होता है।

कांग्रेस ने यह भी कहा कि यह क्षेत्र जैव विविधता से भरपूर है और यहां हजारों कोरल कॉलोनियां तथा लेदरबैक कछुओं का महत्वपूर्ण नेस्टिंग स्थल मौजूद है। ऐसे में परियोजना से पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है।

आदिवासी अधिकारों को लेकर भी पार्टी ने सवाल उठाए हैं। जयराम रमेश के अनुसार निकोबारी समुदाय ने परियोजना के प्रभाव को लेकर चिंता जताई है और कथित तौर पर बिना पूरी जानकारी दिए सहमति ली गई। वहीं शोंपेन जनजाति जैसे अलग-थलग रहने वाले समुदायों की सहमति पर भी संदेह जताया गया है।

कांग्रेस ने परियोजना की व्यवहारिकता पर भी सवाल उठाते हुए प्रस्तावित हवाईअड्डे की 1 करोड़ वार्षिक यात्रियों की क्षमता को अवास्तविक बताया है। साथ ही, पर्यावरण स्वीकृति से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक न करने पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया गया है।

वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि यह परियोजना रणनीतिक, आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसमें पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखा गया है।

कुल मिलाकर, ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है और अब इस मुद्दे पर संसद में व्यापक बहस की मांग जोर पकड़ रही है।

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