“नो न्यूक्लियर, खुला होर्मुज़ और शर्तों पर लाभ” अमेरिका-ईरान समझौते के 3 स्तंभों पर वेंस का खुलासा

By अनिरुद्ध नारायण (इंटर्न)

वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसके तीन प्रमुख स्तंभों का खुलासा किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समझौता सख्त शर्तों पर आधारित होगा और ईरान को किसी भी प्रकार का लाभ तभी मिलेगा जब वह पूरी तरह नियमों का पालन करेगा।

वेंस के अनुसार, इस समझौते का पहला और सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि ईरान किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। यह अमेरिका की प्राथमिक शर्त है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

दूसरा प्रमुख स्तंभ है—होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह खुला रखना। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, और इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार पर गंभीर असर पड़ता है। समझौते के तहत इसे निर्बाध रूप से चालू रखना अनिवार्य होगा।

तीसरे स्तंभ के तहत वेंस ने साफ किया कि ईरान को आर्थिक लाभ या राहत तभी मिलेगी, जब वह “पूर्ण परिवर्तन” दिखाएगा। इसमें उसके परमाणु कार्यक्रम पर रोक, क्षेत्रीय गतिविधियों में बदलाव और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन शामिल है। बिना इन शर्तों के किसी भी वित्तीय सहायता या प्रतिबंधों में ढील नहीं दी जाएगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस समझौते के तहत संभावित 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण फंड की भी चर्चा है, लेकिन यह पूरी तरह ईरान के व्यवहार और प्रतिबद्धताओं पर निर्भर करेगा।

हालांकि, इस समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ विशेषज्ञ इसे मध्य पूर्व में स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं, तो वहीं आलोचकों का कहना है कि अभी कई मुद्दे—जैसे मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव—स्पष्ट नहीं हैं।

फिलहाल, यह समझौता एक प्रारंभिक रूपरेखा माना जा रहा है और आने वाले समय में इसके विस्तृत प्रावधानों पर बातचीत जारी रहने की संभावना है।

 

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