फरक्का जल संधि पर JDU का अभियान, ‘नीतीश संवाद’ के जरिए बिहार में जनसंपर्क करेगी पार्टी

पटना: फरक्का जल संधि को लेकर बिहार में सियासत तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने इस मुद्दे पर ‘नीतीश संवाद’ अभियान की शुरुआत की है। पार्टी का कहना है कि फरक्का बराज और भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि का बिहार के जल संसाधनों पर प्रभाव पड़ रहा है, इसलिए संधि की समीक्षा के दौरान राज्य के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

12 जिलों में चलेगा ‘नीतीश संवाद’

JDU का यह अभियान गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों में चलाया जाएगा। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा तथा प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा इस अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। पहले चरण में चार जिलों में संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है।

2050 तक बिहार की जरूरतों पर जोर

JDU का कहना है कि फरक्का जल संधि की समीक्षा केवल मौजूदा परिस्थितियों को देखकर नहीं, बल्कि 2050 तक बिहार की जल जरूरतों को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए। पार्टी इस अभियान के जरिए स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों की राय भी जुटाएगी।

2026 में खत्म हो रही है संधि की अवधि

भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे से जुड़ी फरक्का संधि वर्ष 1996 में हुई थी और इसकी अवधि 30 वर्ष निर्धारित की गई थी। ऐसे में इसका मौजूदा कार्यकाल दिसंबर 2026 में समाप्त होना है। संधि के संभावित नवीनीकरण को लेकर बिहार की जल सुरक्षा और राज्य के हितों का मुद्दा अब राजनीतिक बहस के केंद्र में है।

केंद्र ने बिहार के हितों का दिया भरोसा

फरक्का जल संधि को लेकर JDU की चिंताओं के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय झा को आश्वासन दिया है कि संधि के नवीनीकरण से जुड़े किसी भी फैसले में बिहार के जल हितों को ध्यान में रखा जाएगा। केंद्र के इस रुख को बिहार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जल, बाढ़ और सिंचाई का मुद्दा

JDU लंबे समय से फरक्का बराज और गंगा जल बंटवारे के मुद्दे को बिहार की बाढ़, गाद जमने, सिंचाई और जल उपलब्धता से जोड़ती रही है। पार्टी का आरोप है कि बिहार को फरक्का व्यवस्था के कारण नुकसान उठाना पड़ा है और भविष्य की जल जरूरतों के लिए मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है।

‘नीतीश संवाद’ के जरिए JDU अब इस मुद्दे को सीधे जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है। आने वाले समय में फरक्का जल संधि बिहार की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन सकती है।

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