अमित शाह की अध्यक्षता में दक्षिणी राज्यों की बैठक, परिसीमन और कावेरी जल विवाद पर छाया रहा मुद्दा

महाबलीपुरम। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में गुरुवार को तमिलनाडु के महाबलीपुरम में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक हुई। बैठक में दक्षिणी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने परिसीमन, राज्यों की संसदीय हिस्सेदारी, NEET, कावेरी जल बंटवारे और राज्यों को अधिक वित्तीय स्वायत्तता समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए।

परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की चिंता

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मांग की कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखी जाए। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के राष्ट्रीय लक्ष्य को सफलतापूर्वक लागू किया है और इसके लिए उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व में नुकसान नहीं होना चाहिए।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने भी परिसीमन के बाद दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक ताकत कम होने की आशंका जताई। उन्होंने केंद्र से स्पष्ट कानूनी सुरक्षा की मांग की, ताकि जनसंख्या स्थिरीकरण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों की संसद में हिस्सेदारी कम न हो।

कावेरी जल विवाद भी प्रमुख मुद्दा

बैठक में कावेरी नदी के पानी के बंटवारे का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के फैसलों को समय पर लागू कराने की मांग की। वहीं, कर्नाटक की ओर से मेकेदाटु परियोजना का मुद्दा उठाया गया।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने गोदावरी-कावेरी नदी जोड़ परियोजना के जरिए पानी के हस्तांतरण का प्रस्ताव रखा। वहीं केरल ने भी क्षेत्रीय जल प्रबंधन और मुल्लापेरियार बांध से जुड़े मुद्दे पर सहयोग की पेशकश की।

NEET से छूट की मांग

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने राज्य को NEET से छूट देने की मांग दोहराई। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि राज्य कोटे की MBBS, BDS और AYUSH सीटों पर दाखिला 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर किया जाए। उनका तर्क है कि NEET ग्रामीण और सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

बैठक में जल प्रबंधन के अलावा परिवहन, लॉजिस्टिक्स, तटीय सुरक्षा, मादक पदार्थों की तस्करी और आपदा प्रबंधन जैसे अंतरराज्यीय मुद्दों पर भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।

कुल मिलाकर, अमित शाह की अध्यक्षता में हुई यह बैठक दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संघीय ढांचे और जल संसाधनों से जुड़ी चिंताओं के लिहाज से महत्वपूर्ण रही।

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