‘रील्स बनानी हैं तो थिएटर जॉइन कर लें’, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की शिक्षकों को दोटूक
खगड़िया। बिहार में सरकारी शिक्षकों के रील्स और वीडियो बनाने को लेकर चल रही बहस के बीच शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सख्त संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों को रील्स या सिनेमा बनाना है, वे थिएटर जॉइन कर लें। स्कूल बच्चों को पढ़ाने के लिए है, न कि सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाने के लिए।
खगड़िया में मीडिया से बातचीत के दौरान शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षकों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और आदर्श स्थिति में विद्यालय पहुंचना चाहिए। शिक्षक के चेहरे और व्यवहार में गुरु का भाव दिखना चाहिए। जब शिक्षक में गुरु का भाव होगा, तभी बच्चे उन्हें अपना आदर्श मानकर शिष्य बनेंगे।
स्कूल में पढ़ाई पहली प्राथमिकता
मंत्री ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों का मुख्य दायित्व बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है। विद्यालय में पढ़ाई के समय रील्स और मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियों में व्यस्त रहना उचित नहीं है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में बिना सक्षम अधिकारी की लिखित अनुमति के वीडियो और रील्स बनाने तथा उन्हें सोशल मीडिया पर अपलोड करने पर रोक संबंधी निर्देश जारी किए हैं।
मुख्यमंत्री के बयान पर भी दी सफाई
इस दौरान शिक्षा मंत्री ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अपराध और क्राइम को लेकर दिए गए बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मुख्यमंत्री के बयान को ‘स्लिप ऑफ टंग’ बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का आशय संगठित अपराध के खात्मे की बात करना था। उनके मुताबिक, मीडिया में बयान को दूसरे संदर्भ में पेश किया गया।
संगठित अपराध पर नियंत्रण का दावा
मिथिलेश तिवारी ने बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर कहा कि पहले के शासनकाल की तुलना में संगठित अपराध पर नियंत्रण की दिशा में काम हुआ है। उन्होंने राज्य सरकार की कार्रवाई का बचाव करते हुए अपराध के खिलाफ सख्ती जारी रहने की बात कही।
शिक्षा मंत्री के इस बयान के बाद शिक्षकों की सोशल मीडिया गतिविधियों, विद्यालयों में अनुशासन और शिक्षा विभाग के नए दिशा-निर्देशों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।