पंजाब में राहुल गांधी और भगवंत मान के बीच जुबानी जंग तेज, व्यक्तिगत टिप्पणियों से गरमाई सियासत
संगरूर/नई दिल्ली। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ व्यक्तिगत टिप्पणियों का दौर भी शुरू हो गया है। नशे की समस्या, कानून-व्यवस्था और सरकार के कामकाज को लेकर दोनों दल आमने-सामने हैं।
राहुल गांधी ने भगवंत मान पर लगाए आरोप
4 नवंबर को संगरूर में कांग्रेस की ‘इंसाफ रैली’ को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने भगवंत मान पर निशाना साधा। उन्होंने संसद में साथ बिताए दिनों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि मान सुबह 11 बजे भी शराब की गंध के साथ संसद पहुंचते थे।
राहुल गांधी ने कहा कि शराब पीना किसी का निजी मामला हो सकता है, लेकिन पंजाब में नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए मुख्यमंत्री को खुद इस जिम्मेदारी के प्रति गंभीर होना चाहिए। उन्होंने आम आदमी पार्टी से सवाल किया कि पंजाब के किस हिस्से से नशे का कारोबार खत्म किया गया है।
भगवंत मान ने किया पलटवार
राहुल गांधी की टिप्पणी पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राहुल गांधी को शवों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग इस तरह की राजनीति पसंद नहीं करते।
इससे पहले मान ने नशे के मुद्दे पर कांग्रेस के आरोपों को भी राजनीतिक हमला बताया था।
AAP ने राहुल गांधी को ‘पप्पू’ कहकर साधा निशाना
आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने राहुल गांधी की टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने इसे व्यक्तिगत हमला बताते हुए कहा कि इस तरह के आरोपों से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होता। AAP ने सोशल मीडिया पर भी राहुल गांधी को ‘पप्पू’ कहकर निशाना साधा और उनके पुराने बयानों को लेकर तंज कसा।
नशे और कानून-व्यवस्था का मुद्दा बना चुनावी केंद्र
राहुल गांधी ने पंजाब में नशे के कारोबार और गैंगस्टर हिंसा को लेकर भगवंत मान सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार के फैसलों पर दिल्ली में बैठे नेताओं का प्रभाव है। वहीं, AAP ने कांग्रेस पर राज्य में राजनीतिक लाभ के लिए गंभीर मुद्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।
पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 की शुरुआत में होने हैं। ऐसे में नशे की समस्या, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक नेतृत्व को लेकर कांग्रेस और AAP के बीच बढ़ती बयानबाजी आने वाले दिनों में चुनावी बहस का प्रमुख हिस्सा बन सकती है।