सिंधु जल संधि पर भारत का रुख बरकरार, आतंकवाद खत्म होने तक समझौता रहेगा स्थगित

नई दिल्ली:
भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर उसका रुख पहले जैसा ही बना हुआ है और यह समझौता फिलहाल स्थगित (अबेयंस) ही रहेगा। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि पाकिस्तान जब तक सीमा पार आतंकवाद को “विश्वसनीय और स्थायी रूप से” बंद नहीं करता, तब तक इस संधि पर कोई आगे की प्रक्रिया नहीं होगी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत का निर्णय पाकिस्तान द्वारा लगातार आतंकवाद को समर्थन देने के कारण लिया गया है। उन्होंने दोहराया कि भारत की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है और यह नीति आगे भी जारी रहेगी।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान की ओर से हाल ही में कड़े बयान सामने आए हैं। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री ने आरोप लगाया कि भारत संधि के तहत पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है, जबकि पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने इसे “पानी को हथियार बनाने” की चेतावनी दी है।

गौरतलब है कि भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद इस संधि को स्थगित कर दिया था। भारत का मानना है कि पाकिस्तान की गतिविधियों ने द्विपक्षीय सहयोग की मूल भावना को प्रभावित किया है, जिसके कारण यह कदम उठाना पड़ा।

सिंधु जल संधि, जो 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी, छह दशकों से अधिक समय तक दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का आधार रही है। हालांकि मौजूदा तनावपूर्ण परिस्थितियों में इसका भविष्य पाकिस्तान की आतंकवाद पर कार्रवाई पर निर्भर करता नजर आ रहा है।

भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जब तक पाकिस्तान अपनी नीति में ठोस और विश्वसनीय बदलाव नहीं लाता, तब तक इस महत्वपूर्ण जल समझौते की बहाली संभव नहीं है।

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