हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर: जहाज़ों पर फायरिंग, फिर से लागू हुई नाकेबंदी

भारतीय जहाज़ भी निशाने पर, वैश्विक तेल आपूर्ति पर बढ़ा खतरा


अंतरराष्ट्रीय डेस्क।
मध्य पूर्व के रणनीतिक रूप से बेहद अहम Strait of Hormuz में हालात एक बार फिर गंभीर हो गए हैं। जहाज़ों पर फायरिंग की घटनाओं के बीच नाकेबंदी दोबारा लागू कर दी गई है, जिससे वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर बड़ा संकट मंडराने लगा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में कुछ जहाज़ इस मार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहे थे, तभी ईरानी गनबोट्स ने उन पर गोलीबारी की। इस घटना के बाद कई जहाज़ों को बीच रास्ते से ही लौटना पड़ा।

स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब भारत से जुड़े जहाज़ भी इस तनाव की चपेट में आ गए। भारत सरकार ने पुष्टि की है कि दो भारतीय झंडे वाले जहाज़ों पर हमला किया गया, जिसके बाद भारत ने ईरान के राजदूत को तलब कर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।


नाकेबंदी और टकराव की पृष्ठभूमि
दरअसल, यह संकट अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और सैन्य टकराव के बाद शुरू हुआ है। फरवरी से जारी संघर्ष के चलते इस जलमार्ग पर कड़ी निगरानी और आंशिक नाकेबंदी लागू है।

हालांकि कुछ समय के लिए जहाज़ों को गुजरने की अनुमति दी गई थी, लेकिन हालात जल्द ही बदल गए और फिर से सख्ती बढ़ा दी गई। इस दौरान कई जहाज़ों को चेतावनी देकर वापस भेज दिया गया।


वैश्विक असर और बढ़ती चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार, Strait of Hormuz से दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की अशांति का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल कीमतों पर पड़ता है।

लगातार हो रही फायरिंग और नाकेबंदी से सैकड़ों जहाज़ फंसे हुए हैं, जबकि कई देशों ने अपने निर्यात को सीमित करना शुरू कर दिया है।


निष्कर्ष
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक संकट का संकेत है। जहाज़ों पर हमले और बार-बार बदलती नीतियां अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक संबंधों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं।

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