200 साल की हुई हिंदी पत्रकारिता: ‘उदंत मार्तण्ड’ से शुरू हुआ सफर, कोलकाता से जली थी पहली मशाल
रिपोर्ट: अनिरुद्ध नारायण, इंटर्न (BAJMC)
नई दिल्ली/कोलकाता: हिंदी पत्रकारिता ने 30 मई 2026 को अपने 200 वर्ष पूरे कर लिए। इस ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत वर्ष 1826 में कोलकाता से प्रकाशित पहले हिंदी समाचार पत्र ‘उदंत मार्तण्ड’ से हुई थी, जिसे हिंदी पत्रकारिता की आधारशिला माना जाता है।
‘उदंत मार्तण्ड’ का पहला अंक 30 मई 1826 को पंडित जुगल किशोर शुक्ल के संपादन में प्रकाशित हुआ था। इस साप्ताहिक अखबार का उद्देश्य हिंदी भाषी समाज तक समाचार पहुंचाना था और इसका मूल मंत्र था— “हिंदुस्तानियों के हित के हेतु”।
इस ऐतिहासिक अवसर पर नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) में दो दिवसीय सेमिनार और प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें हिंदी पत्रकारिता के शुरुआती दौर के दुर्लभ दस्तावेज और अखबारों के पुराने संस्करण प्रदर्शित किए गए।
कार्यक्रम में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और इस अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट तथा विशेष स्मारिका का विमोचन किया गया। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश भी कार्यक्रम में प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने हिंदी पत्रकारिता की इस 200 साल की यात्रा को प्रेरणादायक बताया।
प्रदर्शनी में 19वीं और 20वीं सदी के कई प्रमुख हिंदी समाचार पत्रों और पत्रिकाओं जैसे ‘समाचार सुधावर्षण’, ‘कविवचनसुधा’, ‘हिंदोस्थान’, ‘सरस्वती’ और ‘आज’ के दुर्लभ संस्करण भी प्रदर्शित किए गए, जो हिंदी पत्रकारिता के विकास की कहानी को दर्शाते हैं।
हालांकि ‘उदंत मार्तण्ड’ का प्रकाशन आर्थिक कारणों से केवल एक वर्ष सात महीने तक ही जारी रह सका, लेकिन इसने हिंदी पत्रकारिता की नींव मजबूत कर दी, जो आज एक विशाल वृक्ष के रूप में पूरे देश में फैल चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिंदी पत्रकारिता का यह 200 वर्षों का सफर न केवल भाषा और समाज के विकास का प्रतीक है, बल्कि यह लोकतंत्र की मजबूती और जनमत निर्माण में मीडिया की अहम भूमिका को भी दर्शाता है।
आज, डिजिटल युग में हिंदी पत्रकारिता नए आयाम छू रही है, लेकिन इसकी जड़ें उसी ‘उदंत मार्तण्ड’ में हैं, जिसने दो शताब्दी पहले सूचना के इस आंदोलन की शुरुआत की थी।