26 नवंबर से सजेगा राजगीर महोत्सव का मंच, बॉलीवुड नाइट से दंगल और तांगा दौड़ तक होंगे आकर्षण

तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में ग्रामश्री, व्यंजन, कृषि और पुस्तक मेला भी लगेगा; सिलाव के खाजा का स्वाद चख सकेंगे पर्यटक

राजगीर/नालंदा। बिहार की अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी राजगीर एक बार फिर संगीत, संस्कृति और परंपरा के रंग में रंगने जा रही है। इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय राजगीर महोत्सव का आयोजन 26 से 28 नवंबर तक किया जाएगा। तीन दिवसीय आयोजन राजगीर के स्टेट गेस्ट हाउस परिसर में होगा। जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं।

महोत्सव में शास्त्रीय संगीत, लोकनृत्य, सूफी गायन और बॉलीवुड नाइट मुख्य आकर्षण होंगे। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की प्रस्तुतियों के साथ दर्शकों को बिहार की लोकसंस्कृति और देश की विविध कलाओं से रूबरू होने का अवसर मिलेगा।

ग्रामश्री मेले में दिखेगा ग्रामीण हुनर

महोत्सव के दौरान ग्रामश्री मेला, व्यंजन मेला, कृषि यांत्रिकीकरण प्रदर्शनी और पुस्तक मेला आयोजित किए जाएंगे। ग्रामश्री मेले में हस्तशिल्प, खादी, हस्तकरघा और काष्ठ कला से जुड़े उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री होगी। इससे स्थानीय कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों को अपने उत्पादों के प्रचार-प्रसार का मंच मिलेगा।

व्यंजन मेले में देशी-विदेशी पकवानों के साथ बिहार के प्रसिद्ध सिलाव के खाजा का स्वाद भी पर्यटकों को आकर्षित करेगा।

दंगल और तांगा दौड़ में दिखेगा पारंपरिक रोमांच

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के अलावा महोत्सव में पारंपरिक खेल और प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी। दंगल, तांगा सज्जा, तांगा दौड़ और पालकी सज्जा जैसे आयोजन लोगों के आकर्षण का केंद्र होंगे।

इसके साथ ही रंगोली, मेहंदी, चित्रकला और ताइक्वांडो प्रतियोगिताओं की भी योजना है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को जिला प्रशासन की ओर से सम्मानित किया जाएगा।

जरासंध अखाड़े से विश्व शांति स्तूप तक हेरिटेज वॉक

राजगीर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से पर्यटकों को परिचित कराने के लिए हेरिटेज वॉक आयोजित करने की भी योजना है। इसके तहत जरासंध अखाड़ा से विश्व शांति स्तूप तक यात्रा प्रस्तावित है। इससे पर्यटकों को राजगीर के ऐतिहासिक महत्व और पर्यटन स्थलों को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।

नवंबर में लौट रहा है महोत्सव

पिछले दो वर्षों से दिसंबर में आयोजित हो रहा राजगीर महोत्सव इस बार फिर नवंबर में लौट रहा है। स्टेट गेस्ट हाउस परिसर में लगातार पांचवीं बार इसका आयोजन होगा। वर्ष 1986 में शुरू हुई इस महोत्सव की परंपरा बिहार की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है।

इस बार भी आयोजन के जरिए स्थानीय कला, शिल्प, खानपान और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की तैयारी है।

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