42 साल की सैन्य सेवा के बाद रिटायर हुए एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संभाली थी वायुसेना की कमान

नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह शनिवार, 31 अक्टूबर को 42 वर्षों की शानदार सैन्य सेवा के बाद सेवानिवृत्त हो गए। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना का नेतृत्व करने वाले एपी सिंह चार शीर्ष सैन्य कमांडरों में आखिरी थे, जिन्होंने इस अभियान के समय देश की तीनों सेनाओं के नेतृत्व के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके रिटायरमेंट के साथ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शीर्ष सैन्य कमान संभालने वाले चारों प्रमुख अधिकारी अब सेवा से विदा हो चुके हैं।

एपी सिंह भारतीय वायुसेना के 28वें प्रमुख थे। उनका कार्यकाल सैन्य तैयारियों, ऑपरेशनल क्षमता, स्वदेशी रक्षा तकनीक और वायुसेना के आधुनिकीकरण पर विशेष जोर देने के लिए जाना जाएगा।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कही थी अहम बात

ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव को साझा करते हुए एपी सिंह ने कहा था, “उस रात हम पूरी तरह लय में थे। हम हमले जारी रख सकते थे, लेकिन हमारा उद्देश्य वह नहीं था। हमारा लक्ष्य पहले ही हासिल हो चुका था।”

उनका यह बयान ऑपरेशन के दौरान वायुसेना की रणनीति और निर्धारित सैन्य उद्देश्यों को लेकर उनकी सोच को दर्शाता है। उनके नेतृत्व में भारतीय वायुसेना ने अभियान के दौरान अपनी परिचालन क्षमता और सटीक हमले करने की ताकत का प्रदर्शन किया।

एपी सिंह ने ऑपरेशन के बाद भी कई मौकों पर इसकी रणनीतिक अहमियत और सैन्य तैयारियों से जुड़े पहलुओं पर खुलकर अपनी बात रखी थी।

चारों शीर्ष सैन्य कमांडर हुए सेवानिवृत्त

एपी सिंह के रिटायरमेंट के साथ ऑपरेशन सिंदूर के समय शीर्ष सैन्य नेतृत्व में शामिल चारों प्रमुख अधिकारी अब सेवा से सेवानिवृत्त हो गए हैं। इनमें चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी और थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी शामिल हैं।

इन सभी अधिकारियों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपने-अपने स्तर पर सैन्य नेतृत्व और समन्वय की जिम्मेदारी संभाली थी।

फाइटर पायलट से वायुसेना प्रमुख तक का सफर

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह एक अनुभवी फाइटर पायलट और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट रहे हैं। चार दशक से अधिक के सैन्य करियर में उन्होंने वायुसेना की परिचालन क्षमता, युद्धक तैयारी और आधुनिकीकरण में योगदान दिया।

उनके कार्यकाल में स्वदेशी रक्षा उपकरणों, नई तकनीकों और सैन्य नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर रहा। उन्होंने लगातार एक ऐसी वायुसेना तैयार करने की आवश्यकता बताई, जो भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो।

जवानों से जुड़ाव रही उनकी पहचान

एपी सिंह की पहचान केवल एक सैन्य कमांडर के रूप में नहीं, बल्कि वायुसेना के जवानों और अधिकारियों से सीधे जुड़ने वाले प्रमुख के तौर पर भी रही। वह युवा अधिकारियों, एयरमैन और कैडेट्स से संवाद करते थे। उनका मानना था कि किसी भी सैन्य संगठन की वास्तविक ताकत उसके जवान और कर्मचारी होते हैं।

रक्षा मंत्रालय ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने पेशेवर दक्षता, जवाबदेही, पहल और सेवा के प्रति गर्व की भावना को लगातार प्रोत्साहित किया।

एयर चीफ मार्शल अशुतोष दीक्षित ने संभाली कमान

सेवानिवृत्ति के दिन एपी सिंह ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद एयर फोर्स स्टेशन के परेड ग्राउंड में उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

उनके बाद एयर चीफ मार्शल अशुतोष दीक्षित ने भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख के रूप में कमान संभाली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी एपी सिंह की 42 वर्षों की विशिष्ट सेवा और नेतृत्व की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

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