“प्रवासी वोटर बने बिहार चुनाव का ‘गेम चेंजर’” — प्रशांत किशोर का बयान

पटना | 
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा है कि बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में रिकॉर्ड तोड़ 65 प्रतिशत मतदान इस बात का संकेत है कि इस बार प्रवासी मजदूर चुनाव के असली “गेम चेंजर” साबित हो रहे हैं। किशोर के मुताबिक, जो लोग छठ पर्व पर अपने घर लौटे थे, वे अब सिर्फ त्योहार मनाने नहीं बल्कि “परिवर्तन के लिए वोट देने” रुके हैं।

“प्रवासी मजदूर अब बदलाव की ताकत हैं”

पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा, “इस बार चुनाव का ‘एक्स फैक्टर’ महिलाएं नहीं बल्कि प्रवासी मजदूर हैं। जो लाखों की संख्या में घर लौटे हैं, वे इस बार सोच रहे हैं — चलो, रुकते हैं, वोट देते हैं, और देखते हैं क्या बदलता है।”

उन्होंने कहा कि बिहार की राजनीति बीते 30 वर्षों से दो नामों — लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार — के बीच फंसी रही। “लेकिन इस बार जनता को तीसरा विकल्प दिख रहा है, और वह विकल्प जन सुराज है,” किशोर ने कहा।

एनडीए से खिसक रहे हैं प्रवासी वोटर

किशोर ने दावा किया कि पहले प्रवासी मजदूर एनडीए के भरोसेमंद वोटर हुआ करते थे, लेकिन अब हवा बदल चुकी है। “एनडीए के लोग छह महीने पहले देशभर में जाकर ‘भारत श्रेष्ठ भारत’ अभियान चला रहे थे, ताकि प्रवासी वापस आकर उनके पक्ष में वोट दें। उन्होंने 12 हजार ट्रेनें चलाईं और किराए में 20 प्रतिशत छूट देने की बात की। लेकिन जब वे प्रवासियों से मिले, तो समझ गए कि ये लोग अब बदलाव चाहते हैं,” उन्होंने कहा।

किशोर का कहना है कि “पहले एनडीए बदलाव का प्रतीक था, अब जन सुराज वही प्रतीक बन गया है। प्रवासी वोटरों की संख्या इतनी बड़ी है कि वे इस बार चुनाव का नतीजा तय कर देंगे।”

“नीतीश कुमार अब नहीं लौटेंगे सत्ता में”

जन सुराज प्रमुख ने दावा किया कि बिहार में इस बार सत्ता परिवर्तन तय है। उन्होंने कहा, “नीतीश जी अब नहीं लौटेंगे। 65-67 प्रतिशत मतदान का मतलब है कि जनता बदलाव चाहती है। अगर लोग सरकार से खुश होते, तो इतना बड़ा मतदान नहीं होता।”

किशोर ने कहा कि 14 नवंबर को जब नतीजे आएंगे, तब बिहार की राजनीति में “एक नया इतिहास लिखा जाएगा।”

प्रवासी वोटरों की संख्या और प्रभाव

जनगणना 2011 के अनुसार, बिहार से करीब 7 लाख प्रवासी मजदूर रोज़गार के लिए देश के अन्य राज्यों — गुजरात, तमिलनाडु, दिल्ली और उत्तर प्रदेश — में काम करते हैं। छठ पर्व (25 से 28 अक्टूबर) पर लाखों प्रवासी राज्य में लौटे और पहले चरण में मतदान के बाद अब दूसरे चरण तक ठहर गए हैं।

पहले चरण में बिहार ने 64.66 प्रतिशत मतदान दर्ज किया, जो राज्य के इतिहास में सबसे अधिक है। दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को 20 जिलों की 122 सीटों पर होगा, जबकि मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी।

— रिपोर्ट : टीडब्ल्यूएम न्यूज़

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