1 फरवरी से तंबाकू और पान मसाला महँगा, सरकार ने अतिरिक्त सेस व उत्पाद शुल्क लागू किया
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने 1 फरवरी, 2026 से तंबाकू उत्पादों और पान मसाला पर अतिरिक्त सेस और उत्पाद शुल्क लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत तंबाकू उत्पादों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क और पान मसाला पर स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा सेस लगाया जाएगा, जो वर्तमान में लागू 28 % जीएसटी तथा मुआवजा सेस को बदल देगा।
सरकार की हालिया अधिसूचना के अनुसार, अब तंबाकू, सिगरेट, गुटखा व चुइंग तंबाकू जैसे “सिन गुड्स” पर 40 % उच्चतम जीएसटी दर के अतिरिक्त नए कर लागू होंगे। बीड़ियाँ 18 % जीएसटी पर ही रहेंगी, लेकिन इन उत्पादों पर भी अतिरिक्त कर का बोझ बढ़ेगा।
नई व्यवस्था में सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी प्रति स्टीक ₹2.05 से ₹8.50 तक होगी, जो सिगरेट की लंबाई के आधार पर अलग-अलग लगाए जाएंगे। छोटे सिगरेट व फिल्टर वाली सिगरेट पर कम, जबकि लंबी एवं प्रीमियम सिगरेट पर अधिक शुल्क होगा।
पान मसाला निर्माताओं को 1 फरवरी से नई स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा सेस अधिनियम के तहत पंजीकरण कराना आवश्यक होगा। उन्हें अपने पैकिंग मशीनों पर सीसीटीवी सिस्टम स्थापित करना होगा और कम से कम 24 महीने तक रिकॉर्डिंग संरक्षित रखनी होगी। इसके साथ ही मशीनों की संख्या और क्षमता की जानकारी भी उत्पाद शुल्क अधिकारियों को देनी होगी। अगर कोई मशीन लगातार 15 दिनों के लिए अकार्यक्षम रहती है तो उस अवधि का उत्पाद शुल्क में छूट भी मिल सकती है।
सरकार का कहना है कि इस नई कर संरचना से कर चोरी कम होगी, राजस्व संग्रह बढ़ेगा और स्वास्थ्य-संबंधी खर्चों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे। पान मसाला पर कुल कर दर लगभग 88 % रहेगी, जिसमें 40 % जीएसटी तथा स्वास्थ्य सेस शामिल हैं।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, इन बदलावों से तंबाकू और पान मसाला उत्पादों की कीमतों में वृद्धि होगी, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक भुगतान करना पड़ेगा। वहीं, सरकार का लक्ष्य है कि उच्च कर दर से तंबाकू के उपयोग को नियंत्रित करने में मदद मिले।