केंद्र सरकार ने राहुल गांधी पर विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव नहीं लाने का निर्णय लिया
नई दिल्ली — लोकसभा के बजट सत्र में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के विवादित बयान को लेकर सरकार ने विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव (Privilege Motion) लाने से हथियार नीचे रख दिए हैं। इसके बावजूद कांग्रेस नेता के भाषण के कुछ हिस्सों को संसद के आधिकारिक रिकॉर्ड से हटाने की तैयारी जारी है।
संसद में पिछले दो दिनों से भारत-अमेरिका के अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर जारी हंगामे के बीच राहुल गांधी ने सरकार पर “भारत माता की चिंता न रखने” जैसे तीखे आरोप लगाए थे, जिन्हें सत्तापक्ष ने “सदन को गुमराह करने वाला” बताया था।
सरकार पहले यह कह चुकी थी कि ऐसे “बेबुनियाद आरोपों” के लिए विशेषाधिकार हनन नोटिस जारी किया जाएगा, लेकिन अब तय हुआ है कि कानूनी कार्रवाई या प्रस्ताव संसद में नहीं लाया जाएगा। हालांकि, राहुल के भाषण के विवादित अंश को सदन की आधिकारिक कार्यवाही से हटाने (expunge) का निर्णय लिया गया है।
कहानी की मुख्य बातें:
- बजट सत्र के दौरान राहुल गांधी के बयान को लेकर संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और विपक्ष तथा सरकार के सांसदों के बीच तीखी नोक-झोंक देखने को मिली।
- राहुल गांधी ने कहा कि उनकी टिप्पणियाँ किसानों, छोटे व्यवसायों और मजदूरों के हित में थीं और देश को किसी भी समझौते के प्रभाव के बारे में जानकारी जानने का अधिकार है।
- संसदीय कार्य मंत्री ने राहुल के बयान को “गलत” बताया और कुछ कांग्रेस सांसदों के व्यवहार की भी आलोचना की।
- इसके विपरीत, कांग्रेस नेता और पार्टी महासचिव ने कहा कि पार्टी विशेषाधिकारmotion का सामना करने को तैयार थी और आरोपों को खारिज भी किया।