देशव्यापी हड़ताल का मिला-जुला असर: कई स्थानों पर सामान्य जीवन प्रभावित, कई में परेशानी नहीं
12 फरवरी, 2026 को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलायी गयी राष्ट्रव्यापी हड़ताल (भारत बंद) का देश में मिला-जुला प्रभाव देखने को मिला, जहाँ कुछ राज्यों में जनजीवन, बैंकिंग और सार्वजनिक सेवाओं पर असर पड़ा, जबकि कई महानगरों में अधिकांश गतिविधियां सामान्य रूप से जारी रहीं।
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने केंद्र सरकार की “श्रमिकोन्मुख, किसान विरोधी और राष्ट्र विरोधी” नीतियों के खिलाफ यह हड़ताल बुलाई थी। उनके अनुसार लगभग 30 करोड़ मजदूर इस आम हड़ताल में शामिल किये जाने का दावा किया गया था।
प्रमुख बातें:
- ओडिशा में 12-घंटे तक के परिचालन प्रभावित रहे, जिसमें सार्वजनिक परिवहन, बाजार, शैक्षणिक संस्थान और व्यापारिक प्रतिष्ठान प्रभावित हुए। भुबनेश्वर, कटक, बालासोर व अन्य शहरों में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर अवरोध के कारण यातायात प्रभावित हुआ।
- झारखंड में बैंकिंग, बीमा और कोल क्षेत्र में हड़ताल का असर दिखा, और वहां के ट्रेड यूनियन तथा कांग्रेस पार्टी ने समर्थन जताया।
- छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीयकृत बैंक बंद रहे, बीमा कार्यालय, डाक सेवाएँ और कुछ खनन गतिविधियों पर असर पड़ा, हालांकि परिवहन सेवाएं सामान्य रहीं।
- तमिलनाडु के थूथुक्कुडी और चेन्नई में बंदरगाहों के संचालन में व्यवधान आया और औद्योगिक क्षेत्र में कुछ उत्पादन इकाइयों में कम कर्मी होने के कारण असर दिखा।
- केरल सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए “डायस नोन्” घोषित किया, जिससे बस सेवाएं और निजी ऑटो-रिक्शा भी प्रभावित हुए।
- गोआ में बैंकिंग परिचालन प्रभावित हुआ, जबकि अन्य आवश्यक सेवाएं सामान्य रहीं।
- मध्य प्रदेश में रक्षा विभाग के 25,000 से अधिक कर्मचारियों ने समर्थन स्वरूप एक घंटे की देरी से काम पर आने का निर्णय लिया, परन्तु स्कूल, कॉलेज और बाजार सामान्य रूप से खुले रहे।
- पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और गुजरात जैसे राज्यों में हड़ताल का कोई विशेष प्रभाव नहीं दिखा; वहाँ कार्यालय, बाजार और परिवहन सेवाएं सामान्य रूप से संचालित रहीं।
ट्रेड यूनियनों की मांगें:
यूनियनों ने चार नए लेबर कोडों को वापस लेने, ड्राफ्ट बीज विधेयक, बिजली संशोधन विधेयक, तथा अन्य सरकारी नीतियों के खिलाफ विरोध जताया है — साथ ही मनरेगा को पुनर्स्थापित करने की मांग भी की गयी है।
नागरिक जीवन पर असर:
जहाँ कुछ क्षेत्रों में बैंक, बीमा कार्यालय और सार्वजनिक सेवाओं में व्यवधान दिखाई दिया, वहीं अधिकतर महानगरों में लोग सामान्य जीवन जीते हुए नज़र आये। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की अल्प प्रभाव वाली हड़ताल का वास्तविक असर आर्थिक गतिविधियों पर सीमित रहा है।