अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: ट्रंप के टैरिफ असंवैधानिक घोषित
वाशिंगटन, 20 फ़रवरी 2026: संयुक्त राज्य अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ (आयात शुल्क) को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने 6–3 के मत से फैसले में कहा कि ट्रंप ने 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपात आर्थिक शक्तियों अधिनियम (IEEPA) के तहत यह चार्ज लगाने का अधिकार नहीं रखा, क्योंकि टैक्स व कस्टम शुल्क लगाने का संवैधानिक अधिकार केवल कांग्रेस के पास है।
मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत राय लिखते हुए कहा कि राष्ट्रपति को बिना कांग्रेस की स्पष्ट मंज़ूरी के ऐसे टैरिफ लागू करने का कोई अधिकार नहीं है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि IEEPA का उद्देश्य आपातकालीन आर्थिक स्थितियों में शक्ति प्रदान करना है, न कि व्यापक व्यापार नीतियों का निर्माण।
टैरिफ नीति पर विवाद लंबे समय से चला आ रहा था। ट्रंप प्रशासन ने इन शुल्कों को राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यापार असंतुलन के बहाने लगाया था, लेकिन उनके आलोचकों ने इसे विधायी अधिकार से परे बताया था। अब यह टैरिफ नीति, जो अप्रैल 2025 से लागू थी, अदालत के फैसले के साथ समाप्त हो गई है।
टैरिफ रद्द होने से वैश्विक व्यापार पर व्यापक असर होने की संभावना है। विश्लेषकों का कहना है कि इससे अमेरिकी व्यापार भागीदारों के लिए राहत की स्थिति बन सकती है और कारोबारियों को उन शुल्क का रिफंड मिलने की संभावनाएं भी बन सकती हैं, हालांकि कोर्ट ने रिफंड प्रक्रिया पर स्पष्ट निर्देश नहीं दिए हैं।
इस फैसले पर ट्रंप ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “बिरोध” बताया और अपने निर्णय का बचाव किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने शक्तियों के विभाजन और संविधान के सिद्धांत को आधार बनाते हुए करार दिया कि टैरिफ लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस को ही प्राप्त है।
यह फैसला न केवल अमेरिका के आंतरिक आर्थिक ढांचे को प्रभावित करेगा बल्कि वैश्विक व्यापार नीति और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है।