आयातुल्लाह अलीरेजा आराफी हुए अंतरिम सर्वोच्च नेता — शक्ति संक्रमण की नई शुरूआत

तेहरान

इरान में सुप्रीम लीडर आयातुल्लाह अली ख़ामनेई की मौत के बाद देश के राजनीतिक नेतृत्व में बड़ा बदलाव आया है। वरिष्ठ शिया धर्मगुरु आयातुल्लाह अलीरेजा आराफी को अस्थाई (इंटरिम) सर्वोच्च नेता के रूप में नियुक्त कर दिया गया है।
राज्य-संलग्न समाचार एजेंसियों और वैश्विक मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 111 के तहत की गई है, जिसमें सर्वोच्च नेतृत्व के रिक्त होने पर एक अस्थायी नेतृत्व परिषद का गठन होता है। यह परिषद देश के राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश के साथ मिलकर शासन-कार्य संभालेगी, जब तक कि असेंबली ऑफ़ एक्सपर्ट्स स्थायी नेता का चुनाव नहीं कर लेती।

क्या हुआ? — घटनाक्रम

  • इरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली ख़ामनेई की हाल ही में संयुक्त अमेरिकी-इज़राइली वायु हमले में मौत की पुष्टि हुई है। उनके निधन के बाद देश में नेतृत्व-संक्रमण प्रक्रिया शुरू हुई।
  • इसी प्रक्रिया के तहत आराफी को अस्थायी नेतृत्व परिषद का धर्म-गुरु (क्लेरिकल जूरिस्ट) सदस्य चुना गया है, जो देश के सर्वोच्च अधिकारियों के साथ मिलकर शासन कार्य जारी रखेगा।

आराफी कौन हैं?

आयातुल्लाह अलीरेजा आराफी 67 वर्ष के वरिष्ठ शिया धर्मगुरु हैं। वे तक़रीबन दशकों से ईरानी धार्मिक और राजनीतिक संरचना में सक्रिय रहे हैं और गार्डियन काउंसिल, असेंबली ऑफ़ एक्सपर्ट्स तथा अन्य महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। उनके पास प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ धार्मिक नेतृत्व की भी बड़ी भूमिका रही है।

नेतृत्व परिषद का कार्यभार

हाल के राजनीतिक सुधार के अनुसार, अस्थायी नेतृत्व परिषद में निम्न प्रमुख सदस्य शामिल हैं:

  • आराफी (धार्मिक सदस्य)
  • मसूद पेज़ेशकियन (इरान के राष्ट्रपति)
  • मुख्य न्यायाधीश (गोलाम-होसैन मोहसेनी-एजीई)

यह तीन-सदस्यीय परिषद देश की सर्वोच्च नेतृत्व शक्तियों का संयुक्त रूप से निष्पादन करेगी, जब तक कि असेंबली ऑफ़ एक्सपर्ट्स नया स्थायी सर्वोच्च नेता नियुक्त नहीं करती।

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