पटना में ‘बादशाहत का खात्मा’ का प्रभावशाली मंचन, मंटो की संवेदनाओं ने दर्शकों को किया भावुक

पटना।
रंगम नाट्य संस्था द्वारा 28 मार्च को अख्तर अली लिखित नाटक ‘बादशाहत का खात्मा’ का मंचन शहर के Imagination School of Drama & Film Making थियेटर स्टूडियो में किया गया। उर्दू के महान कथाकार सआदत हसन मंटो की कहानियों के संवादों पर आधारित यह नाट्य प्रयोग अपनी प्रस्तुति और संवेदनात्मक गहराई के कारण दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।

नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन रास राज ने किया। उद्घाटन सत्र में शहर की कई प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं, जिनमें नेहा निहारिका चौहान (न्यूज़ 18 फेम ‘भाभी जी मैदान में’), वरिष्ठ अभिनेत्री अनुपमा पाण्डेय, काजल विशाल, अभिनेत्री एवं योग प्रशिक्षक निभा और विभा शामिल थीं।

कहानी ने छोड़ा गहरा असर
नाटक की कहानी एक लेखक मनमोहन के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे एक सप्ताह के लिए अपने दोस्त का ऑफिस मिलता है। वह इस जगह को अपनी ‘बादशाहत’ मान बैठता है, जहां वह अपनी रचनात्मक स्वतंत्रता का आनंद लेता है। इसी दौरान एक अनजानी महिला की आवाज़ उसके जीवन में प्रवेश करती है। ‘रॉन्ग नंबर’ से शुरू हुई बातचीत धीरे-धीरे प्रेम, दर्शन और समाज की जटिलताओं तक पहुंच जाती है।

मनमोहन उस आवाज़ से इतना प्रभावित हो जाता है कि वास्तविकता से कटकर उसी के इंतजार में जीने लगता है। नाटक का चरम बेहद मार्मिक है, जब वह उस एक कॉल के इंतजार में अपनी जान गंवा देता है और उसकी मृत्यु के बाद फोन की घंटी बजती है, जो उसकी ‘बादशाहत’ के अंत का प्रतीक बन जाती है।

कलाकारों का दमदार अभिनय
मंच पर मनमोहन की भूमिका में रास राज और महिला पात्र के रूप में प्रतीक्षा आनंद ने सशक्त अभिनय से दर्शकों को बांधे रखा। दोनों कलाकारों की संवाद अदायगी और भाव-प्रदर्शन को खूब सराहा गया।

तकनीकी पक्ष भी रहा प्रभावी
नाटक के सफल मंचन में तकनीकी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रकाश परिकल्पना शिवम कुमार, संगीत तनु राय, वस्त्र विन्यास पिंकू राज, फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी परमिन्द्र सिंह सांघा ने संभाली। मंच व्यवस्था निहाल कुमार दत्ता द्वारा की गई, जबकि रूप सज्जा निभा ने की। मीडिया प्रभारी सुधीर कुमार, मंच परिकल्पना पिंकू राज और प्रस्तुति संयोजक रश्मि सिंह रहीं।

कार्यक्रम के अंत में संस्था ने Imagination School of Drama & Film Making, प्रयास पटना, मनोज राज तथा उपस्थित अतिथियों, रंगप्रेमियों और मीडिया बंधुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

यह नाट्य प्रस्तुति न केवल एक कलात्मक प्रयोग थी, बल्कि मानवीय भावनाओं और प्रतीक्षा की त्रासदी को गहराई से दर्शाने का सशक्त माध्यम भी बनी।

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