“राष्ट्र की इच्छाशक्ति ही असली ताकत”: NSA अजीत डोभाल का बड़ा बयान, सुरक्षा में जनता की भूमिका अहम

गांधीनगर, संवाददाता:
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने देश की सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि किसी भी राष्ट्र की सुरक्षा केवल सैन्य ताकत से नहीं, बल्कि उसकी जनता की इच्छाशक्ति और मनोबल से तय होती है।

गुजरात के गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU) के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए डोभाल ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा एक जटिल और बहुआयामी अवधारणा है, जिसमें सैन्य शक्ति, तकनीक, संसाधन और कूटनीति के साथ-साथ नागरिकों की मानसिक शक्ति भी बेहद महत्वपूर्ण होती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी राष्ट्र की ताकत का आकलन करते समय सबसे बड़ी भूल उसकी जनता की इच्छाशक्ति को नजरअंदाज करना होता है। कई वैश्विक उदाहरणों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कई युद्धों में तकनीकी और सैन्य श्रेष्ठता के बावजूद देशों को पीछे हटना पड़ा, क्योंकि स्थानीय जनता का मनोबल और प्रतिबद्धता ज्यादा मजबूत थी।

डोभाल ने यह भी जोर दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना, पुलिस या खुफिया एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के नागरिकों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जागरूकता, अनुशासन और सामूहिक प्रतिबद्धता से ही राष्ट्र की सुरक्षा मजबूत होती है।

युवाओं को संदेश देते हुए NSA ने कहा कि सुरक्षा के क्षेत्र में काम करने वालों के लिए समर्पण और दृढ़ निश्चय अनिवार्य है। यह ऐसा क्षेत्र है जहां “जीत ही सब कुछ है”, क्योंकि हार का मतलब अस्तित्व पर संकट हो सकता है।

समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति में अजीत डोभाल को राष्ट्रीय सुरक्षा में उनके योगदान के लिए मानद पीएचडी की उपाधि भी प्रदान की गई।

 

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