‘बहाने’ ने बिखेरी हंसी और दिया सामाजिक संदेश, हिन्दी साहित्य सम्मेलन में हुआ शानदार मंचन

पटना: नाट्य संस्था बिन्नागुरी रंग अभिलाष द्वारा 31 मई को हिन्दी साहित्य सम्मेलन, कदम कुआं, पटना में प्रसिद्ध लेखक अशोक पागल द्वारा लिखित एवं बिकेश साह द्वारा निर्देशित नाटक ‘बहाने’ का सफल मंचन किया गया। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को हास्य के साथ-साथ सामाजिक संदेश भी दिया।

कथासार:
नाटक ‘बहाने’ एक हास्यप्रधान प्रस्तुति है, जिसका मूल उद्देश्य समाज में व्याप्त दिखावे और चालाकियों पर व्यंग्य करना है। कहानी एक पंडित जी और उनके मूर्ख शिष्य भोला के इर्द-गिर्द घूमती है। एक दिन पानी न आने के कारण पंडित जी बिना स्नान किए पूजा कराने निकल पड़ते हैं और शिष्य को सख्त निर्देश देते हैं कि इस बात का खुलासा किसी से न करे।

लेकिन भोला, अपनी मासूमियत और मूर्खता के कारण, इस आदेश को निभाने के प्रयास में कई हास्यास्पद परिस्थितियां पैदा कर देता है। विभिन्न पात्रों के साथ उसके संवाद दर्शकों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर देते हैं। नाटक के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया गया कि सच्चाई और सरलता ही सबसे बड़ी ताकत है।

मंच पर कलाकारों का दमदार अभिनय:
पंडित जी की भूमिका में आदित्य शर्मा ने प्रभावशाली अभिनय किया, जबकि भोला के किरदार में बिकेश साह ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
अन्य कलाकारों में मुरली (चन्दन कुमार गुप्ता), कुन्दन (रूपेश कुमाऊ), एक व्यक्ति (भृगु रंजन) और मैडम जी (प्रेरणा प्रिया) ने भी अपने अभिनय से मंच को जीवंत बना दिया।

मंच के पीछे की टीम:
प्रकाश व्यवस्था में रीतिक कुमार, संगीत में जिगर कुमार और रूप सज्जा में पूजा कुमारी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। परिकल्पना स्वयं निर्देशक बिकेश साह की रही, जबकि सामग्री व्यवस्था चन्दन कुमार गुप्ता ने संभाली। वस्त्र विन्यास में नीरज साह का योगदान सराहनीय रहा।
सहयोग में राहुल झा, नितेश साह और रामकृष्ण मंडल की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही।

नाटक के सफल मंचन ने यह साबित कर दिया कि रंगमंच आज भी समाज को जोड़ने और जागरूक करने का सशक्त माध्यम है।

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