भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच नागरिक परमाणु समझौते को लेकर अहम व्यवस्था पर हस्ताक्षर

नई दिल्ली/मेलबर्न। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऊर्जा सहयोग को नई मजबूती देते हुए दोनों देशों ने नागरिक परमाणु समझौते के तहत महत्वपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था (Arrangement) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया अब भारत को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम निर्यात कर सकेगा।

यह कदम भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समझौते के तहत यूरेनियम का उपयोग केवल नागरिक परमाणु ऊर्जा उत्पादन में किया जाएगा और इस पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी रहेगी।

दोनों देशों के बीच यह समझौता लंबे समय से लंबित था, जिसे अब अंतिम रूप दे दिया गया है। इससे पहले 2014 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच नागरिक परमाणु सहयोग समझौता हुआ था, लेकिन इसके क्रियान्वयन में कई प्रक्रियात्मक अड़चनें थीं।

इस नए समझौते के साथ भारत को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी, वहीं ऑस्ट्रेलिया को अपने यूरेनियम निर्यात के लिए एक बड़ा बाजार मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह समझौता भारत के 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लक्ष्य को हासिल करने में सहायक साबित होगा।

इसके अलावा, दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, हरित ऊर्जा और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है, जिससे द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे।

यह समझौता भारत-ऑस्ट्रेलिया रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने के साथ-साथ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग को भी मजबूती प्रदान करेगा।

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