खून से सनी वर्दी, घंटों अस्पताल में इंतजार: दिल्ली हिंसा में घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों का दर्द
नई दिल्ली: दिल्ली में हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा ने सिर्फ सड़कों पर ही नहीं, बल्कि पुलिसकर्मियों के परिवारों के जीवन में भी गहरा असर छोड़ा है। घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने उस दर्दनाक मंजर को बयान किया है, जब उनके अपने खून से सनी वर्दी में अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे थे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए, जिनमें एक एसीपी सहित कई अधिकारी शामिल थे। इन सभी को इलाज के लिए राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका हालचाल भी जाना।
परिवारों का कहना है कि उन्हें घंटों तक अस्पतालों में इंतजार करना पड़ा, जबकि उनके परिजन ऑपरेशन और इलाज से गुजर रहे थे। कई मामलों में पुलिसकर्मियों को सिर, हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस हिंसा में 100 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए। हालात इतने गंभीर थे कि पूरे बल की छुट्टियां रद्द कर दी गईं और सभी को ड्यूटी पर तैनात रहने के निर्देश दिए गए।
परिजनों ने भावुक होकर बताया कि “वर्दी के पीछे भी एक इंसान होता है, जिसका परिवार होता है।” पुलिस ने भी इस बात पर जोर दिया कि ड्यूटी के दौरान घायल होने वाले जवानों के दर्द को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यह हिंसा उस समय भड़की जब ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बल आमने-सामने आ गए। हालात बिगड़ने पर पत्थरबाजी, धक्का-मुक्की और लाठीचार्ज जैसी घटनाएं सामने आईं, जिससे दोनों पक्षों में कई लोग घायल हुए।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बड़े प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ पुलिसकर्मियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। वहीं, पीड़ित परिवारों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और पुलिसकर्मियों के लिए बेहतर सुरक्षा इंतजाम की मांग की है।
दिल्ली की सड़कों पर हुई इस हिंसा की गूंज अब परिवारों के दर्द में भी साफ सुनाई दे रही है।