छात्रों के विरोध के बाद बिहार सरकार का बड़ा फैसला, TRE-4 अब एक चरण में; भर्ती सुधार के लिए बनेगी विशेषज्ञ समिति

पटना। बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि Teacher Recruitment Examination-4 (TRE-4) अब दो चरणों के बजाय एक ही चरण में आयोजित की जाएगी। सरकार ने छात्रों की अन्य मांगों पर भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शुरू से ही छात्रों की मांगों को लेकर गंभीर रही है। TRE-4 को एक चरण में कराने के साथ-साथ भर्ती और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े 9 अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए हैं।

परीक्षा सुधार के लिए बनेगी विशेष समिति

सरकार ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार के लिए ‘स्पेशल एक्सपर्ट कमेटी ऑन एग्जामिनेशन रिफॉर्म्स’ गठित करने का फैसला किया है। इस समिति की अध्यक्षता पटना हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश करेंगे। समिति छात्रों की परीक्षा संबंधी शिकायतों और भर्ती प्रक्रिया में सुधार के सुझावों पर भी विचार करेगी।

डोमिसाइल और उम्र सीमा पर भी विचार

सरकार ने बिहार में सरकारी भर्तियों में डोमिसाइल नीति को अधिकतम प्रभावी बनाने, भर्ती परीक्षाओं में अधिकतम आयु सीमा और संविदाकर्मियों को भर्ती में अलग कोटा, अंक या वेटेज देने जैसे मुद्दों को भी विशेषज्ञ समिति के सामने रखने का निर्णय लिया है।

इसके अलावा रिक्त लाइब्रेरियन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है। छात्रों की एक प्रमुख मांग भर्ती कैलेंडर जारी करने और उसमें निर्धारित समयसीमा का पालन करने की भी है।

प्रश्नपत्र और OMR की पारदर्शिता पर जोर

भर्ती परीक्षाओं में प्रश्नपत्र, OMR शीट और उत्तर पुस्तिकाओं से जुड़ी पारदर्शिता के मुद्दे को भी विशेषज्ञ समिति के सामने रखा जाएगा। वहीं, BPSC की AEDO और सैनिटरी से जुड़ी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के मामलों की निष्पक्ष जांच के लिए आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की कार्रवाई जारी है।

शिकायतों के समाधान के लिए पोर्टल और कैंप

छात्रों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए सरकार ने Student Assistance Portal और Student Assistance Camps शुरू करने की भी घोषणा की है। सरकार के अनुसार, इन माध्यमों से छात्रों की शिकायतों का समाधान 30 दिनों के भीतर करने का प्रयास किया जाएगा।

छात्रों के आंदोलन के बीच TRE-4 को एक चरण में कराने का फैसला सरकार और अभ्यर्थियों के बीच जारी गतिरोध को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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