‘टॉक्सिक’ देखकर दर्शकों ने कहा—ऑफिस ही चले जाते! Yash की फिल्म पर जमकर बरसे दर्शक, मिला सिर्फ ⭐

Yash की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘Toxic’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म को लेकर दर्शकों और समीक्षकों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। जहां Yash की स्क्रीन प्रेजेंस और फिल्म की सिनेमैटोग्राफी को सराहा गया है, वहीं कहानी, स्क्रीनप्ले, एडिटिंग, महिला किरदारों के चित्रण और जरूरत से ज्यादा एक्शन को लेकर फिल्म की जमकर आलोचना हो रही है।

एक दर्शक ने बेहद व्यंग्यात्मक अंदाज में फिल्म को लेकर लिखा कि जिन लोगों ने अभी तक ‘Toxic’ नहीं देखी है और 18 साल से कम उम्र के वे लोग जो इसे नहीं देख सकते, वे भगवान के पसंदीदा इंसान हैं।

दर्शक के मुताबिक, फिल्म देखने के बाद आपको उन दिनों की याद आने लगेगी जब आप बिस्तर पर लेटे रहकर कुछ नहीं करते थे। यहां तक कि अगर कोई व्यक्ति ऑफिस से छुट्टी लेकर फिल्म देखने गया हो, तो फिल्म खत्म होने के बाद उसे ऑफिस भी याद आने लगेगा।

क्या है ‘Toxic’ की कहानी?

फिल्म की कहानी Raya नाम के एक बेरहम गैंगस्टर और उसकी परित्यक्त बहन के इर्द-गिर्द घूमती है। दोनों पुर्तगाली शासन वाले गोवा में अपना आपराधिक नेटवर्क खड़ा करते हैं। हालांकि, Raya के पुराने कर्म वापस उसके सामने आ खड़े होते हैं और उसे अपने फैसलों की कीमत चुकानी पड़ती है।

लेकिन आलोचक का कहना है कि कहानी इतनी कमजोर है कि इसे ‘प्लॉट’ कहना भी मुश्किल है।

स्क्रीनप्ले: स्टाइल ज्यादा, कहानी कम

रिव्यू के मुताबिक, फिल्म का पहला भाग बेहद तेज, शोरगुल वाला और खाली महसूस होता है। फिल्म में स्टाइल तो भरपूर है, लेकिन कहानी और किरदारों में गहराई की कमी नजर आती है।

एक्शन, ग्लैमर और लगातार आने वाले बड़े-बड़े हीरो एंट्री शॉट्स के बावजूद कोई भी किरदार दर्शकों पर खास प्रभाव नहीं छोड़ पाता।

दूसरे भाग में स्थिति और उलझ जाती है। एक के बाद एक घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन उनके बीच तारतम्य कमजोर पड़ जाता है। बार-बार दोहराए जाने वाले एक्शन सीक्वेंस दर्शकों का धैर्य भी परखते हैं।

क्लाइमेक्स में आने वाला ट्विस्ट भी दर्शक को प्रभावित करने में नाकाम रहता है।

रिव्यू में इसे लेकर बेहद मजेदार टिप्पणी की गई—पूरे थिएटर में दर्शकों के मन में बस एक ही बात चल रही थी:

“मुझे घर जाना है।”

डायलॉग्स भी नहीं बचा पाए फिल्म

फिल्म के संवादों को भी आलोचना का सामना करना पड़ा है। रिव्यू में फिल्म के एक संवाद का उदाहरण देते हुए इसे बेहद अजीब और अतिनाटकीय बताया गया है।

Yash की एक्टिंग सबसे मजबूत, लेकिन ‘Rocky Bhai’ मोड बरकरार

फिल्म में Yash को सबसे ज्यादा सराहना मिली है। उनके अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस को फिल्म की सबसे बड़ी ताकत माना गया है।

हालांकि, आलोचना यह भी है कि Yash अभी तक अपने ‘Rocky Bhai’ वाले अंदाज से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाए हैं।

फिल्म में बार-बार स्लो-मोशन एंट्री, हीरो शॉट्स और Yash की पूजा जैसे दृश्यों की भरमार है। इतनी ज्यादा कि ऐसा महसूस होने लगता है कि कैमरा भी Yash के सामने खुद को रोक नहीं पाता।

महिला किरदारों को लेकर भी उठे सवाल

फिल्म में छह महिला किरदार होने के बावजूद उनके चरित्र-चित्रण को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

Kiara Advani की Nadia शुरुआत में प्रभावी नजर आती हैं, लेकिन बाद में उनका किरदार Yash के Raya के सामने काफी हद तक पीछे छूट जाता है।

Nayanthara की Ganga को एक शानदार एंट्री मिलती है, लेकिन आगे चलकर उनका किरदार एक पारंपरिक मां जैसी भूमिका तक सीमित दिखाई देता है।

Rukmini Vasanth की Melissa को लेकर भी आलोचना की गई है। रिव्यू के अनुसार, उनके किरदार को न पर्याप्त बैकस्टोरी मिलती है और न ही कोई मजबूत विकास।

वहीं Huma Qureshi और Tara Sutaria के किरदारों को लेकर रिव्यू बेहद निराश नजर आता है।

एक सवाल—फिल्म में हर कोई इतना चिल्ला क्यों रहा है?

फिल्म की सबसे मजेदार आलोचनाओं में से एक इसके लगातार तेज आवाज वाले संवाद और चीखने-चिल्लाने को लेकर है।

रिव्यू के मुताबिक, फिल्म के किरदार इतने ज्यादा चिल्लाते हैं कि इसका खामियाजा दर्शकों को भी भुगतना पड़ता है।

टेक्निकल फ्रंट पर कैसी है फिल्म?

एडिटिंग

एडिटिंग को फिल्म का सबसे कमजोर पक्ष बताया गया है। घटनाओं के बीच तालमेल और कट्स इतने अनियमित महसूस होते हैं कि पूरी फिल्म एक बिखरे हुए अनुभव जैसी लगती है।

सिनेमैटोग्राफी

फिल्म की सिनेमैटोग्राफी को हालांकि खूब सराहा गया है। विजुअल्स को उन चुनिंदा तकनीकी पहलुओं में माना गया है जो फिल्म को मजबूत बनाते हैं।

म्यूजिक

गाने और बैकग्राउंड म्यूजिक भी आलोचक को प्रभावित नहीं कर पाए। शिकायत यही रही कि संगीत भी कई जगह जरूरत से ज्यादा तेज और शोरभरा लगता है।

‘Toxic’ का फैसला

कुल मिलाकर, रिव्यू के मुताबिक ‘Toxic’ एक ऐसी फिल्म है जिसमें स्टाइल, एक्शन और Yash की स्टार पावर तो भरपूर है, लेकिन कहानी, स्क्रीनप्ले और किरदारों की गहराई की कमी इसे कमजोर कर देती है।

फिल्म को सिर्फ ⭐ 1/5 की रेटिंग दी गई है।

रिव्यू का सबसे तीखा निष्कर्ष यही है कि अगर कोई व्यक्ति यह फिल्म देखने के बाद भी सिनेमाघर जाने का फैसला करता है, तो वह Saridon लेकर जाए और अपने जोखिम पर फिल्म देखे।

क्योंकि आलोचक के मुताबिक, ‘Toxic’ वह फिल्म है जिसे आप अपने दुश्मनों को सुझा सकते हैं—बदला लेने के लिए।

क्या आपने ‘Toxic’ देखी है? ईमानदारी से बताइए—फिल्म देखकर आप भी बच पाए या नहीं?

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