तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में घुसा बाढ़ का पानी, नाव बनी सहारा; निचले तल का कामकाज ठप
भागलपुर: गंगा के बढ़ते जलस्तर से भागलपुर में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) परिसर भी पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ गया है। प्रशासनिक और परीक्षा भवन के निचले तल में पानी भरने से कई शाखाओं का कामकाज प्रभावित हुआ है। अब विश्वविद्यालय परिसर में आवाजाही के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
प्रशासनिक भवन तक पहुंचने के लिए दो नावें
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार से वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर दो नावों का परिचालन शुरू किया है। परिसर में आने वाले छात्र, कर्मचारी और अन्य लोग प्रशासनिक या परीक्षा भवन तक पहुंचने के लिए इन नावों का इस्तेमाल कर सकेंगे। एक नाव विश्वविद्यालय परिसर स्थित बैंक के पास और दूसरी प्रशासनिक भवन के गेट के सामने रहेगी।
लालबाग स्थित आवासीय परिसर में रहने वाले शिक्षकों और कुलपति आवास तक आवाजाही के लिए भी एक नाव उपलब्ध कराई गई है।
निचले तल की शाखाओं में काम बंद
बाढ़ का पानी प्रशासनिक भवन और परीक्षा भवन के निचले तल तक पहुंच गया है। इसके कारण इन हिस्सों में कामकाज ठप है। विश्वविद्यालय के जरूरी दस्तावेज और फाइलें सुरक्षित स्थान पर रख दी गई हैं। सीनेट हॉल में भी पानी भरने से वहां रखी कुर्सियां डूब गई हैं और हॉल को दोबारा उपयोग में लाने में समय लग सकता है।
कई शिक्षक क्वार्टर खाली कर चुके
जलस्तर बढ़ने के बाद कई शिक्षकों ने विश्वविद्यालय परिसर स्थित अपने आवास खाली कर दिए हैं। कुछ शिक्षक ऊपरी मंजिलों पर रह रहे हैं और नाव के जरिए आवाजाही कर रहे हैं। बाढ़ के कारण विश्वविद्यालय के निचले हिस्सों में सांप समेत जहरीले जीवों का खतरा भी बढ़ गया है। कर्मचारियों के मुताबिक पानी भरने के दौरान ये जीव सूखी जगहों की तलाश में भवनों के अंदर पहुंच सकते हैं।
छात्राओं का हॉस्टल भी खाली
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए लालबाग स्थित गर्ल्स हॉस्टल को भी छात्राओं ने खाली कर दिया है। इसको लेकर छात्र राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने विश्वविद्यालय प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। संगठन ने छात्राओं के लिए वैकल्पिक सुरक्षित आवास, जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था और बाढ़ से निपटने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने की मांग की है।
हर साल बाढ़ से प्रभावित होता है परिसर
विश्वविद्यालय परिसर के मुख्य मार्ग तक भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। यदि जलस्तर में जल्द कमी नहीं आई तो केंद्रीय पुस्तकालय के सामने की मुख्य सड़क भी पानी में डूब सकती है। इस बीच बिहार में गंगा समेत कई नदियों के उफान से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी है।