बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर: जेडीयू को हराने वाले दोनों निर्दलीय MLC भाजपा के साथ, शपथ से पहले सदस्यता पर विवाद
पटना। बिहार की राजनीति में विधान परिषद चुनाव के बाद एक नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है। जेडीयू के आधिकारिक उम्मीदवारों को हराकर विधान पार्षद बने बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज ने भाजपा का दामन थाम लिया है। शनिवार को पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी की मौजूदगी में दोनों नेताओं ने पार्टी की सदस्यता ली। हालांकि, दोनों के इस फैसले पर विपक्ष ने सवाल उठाते हुए इसे संविधान और दल-बदल कानून के खिलाफ बताया है।
दोनों नेताओं का भाजपा में आना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने हालिया विधान परिषद चुनाव में एनडीए के घटक दल जेडीयू के उम्मीदवारों को पराजित किया था। इस घटनाक्रम से भाजपा को परिषद में दो अतिरिक्त सदस्यों का समर्थन मिला है, वहीं एनडीए के भीतर सहयोगी दलों के बीच राजनीतिक असहजता बढ़ने के संकेत हैं।
राहुल राज ने आनंद पुष्कर को दी थी शिकस्त
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार राहुल राज ने जेडीयू प्रत्याशी आनंद पुष्कर को 1,815 मतों से हराया था। राहुल पहले भाजपा से जुड़े रहे थे, लेकिन पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ने के कारण उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया था। चुनाव जीतने के बाद उन्होंने फिर से भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।
बंशीधर ब्रजवासी ने दूसरी बार हराया जेडीयू उम्मीदवार
तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से बंशीधर ब्रजवासी ने जेडीयू उम्मीदवार अभिषेक झा को 9,147 मतों के अंतर से पराजित किया। ब्रजवासी ने लगातार दूसरी बार इस सीट पर जीत दर्ज की है। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से बातचीत के बाद उन्होंने यह फैसला लिया है। उनके मुताबिक, भाजपा के साथ रहकर वे अपने निर्वाचन क्षेत्र के मुद्दों को बेहतर तरीके से उठा सकेंगे।
राजद ने बताया असंवैधानिक, दल-बदल कानून का उठाया मुद्दा
दोनों निर्दलीय विधान पार्षदों के भाजपा में शामिल होने पर राजद ने कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने इसे असंवैधानिक और गैरकानूनी करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि विधान परिषद की शपथ लेने से पहले ही दोनों निर्वाचित सदस्यों को भाजपा में शामिल कराना संविधान और सदन की नियमावली के अनुरूप है या नहीं।
राजद ने आरोप लगाया कि भाजपा ने अपने सहयोगी जेडीयू के उम्मीदवारों को हराने वाले नेताओं को पार्टी में शामिल कर गठबंधन धर्म की अनदेखी की है। पार्टी ने इसे भाजपा और जेडीयू के बीच बढ़ती राजनीतिक दूरी का संकेत भी बताया।
जन सुराज भी उठा सकता है कानूनी कदम
इस मामले में जन सुराज ने भी आपत्ति जताई है। पार्टी की ओर से दोनों नेताओं के भाजपा में शामिल होने के मामले को विधान परिषद के सभापति, चुनाव आयोग और अदालत में चुनौती देने की बात कही गई है। विवाद का केंद्र संविधान की दसवीं अनुसूची और निर्दलीय निर्वाचित सदस्यों पर लागू दल-बदल संबंधी प्रावधान हैं।
संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत निर्दलीय निर्वाचित सदस्य के चुनाव के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होने पर उसकी सदस्यता समाप्त होने का प्रावधान है। हालांकि, इस मामले में दोनों नेताओं की सदस्यता पर अंतिम फैसला सक्षम संवैधानिक प्राधिकारी ही करेगा।
विधान परिषद में भाजपा की बढ़ी ताकत
भाजपा कार्यालय में आयोजित विधानमंडल दल की बैठक में दोनों नवनिर्वाचित विधान पार्षदों ने हिस्सा लिया। बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, बिहार भाजपा प्रभारी हरीश द्विवेदी, प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ भाजपा को विधान परिषद में अतिरिक्त समर्थन मिला है, तो दूसरी तरफ जेडीयू के उम्मीदवारों को हराने वाले नेताओं के भाजपा के साथ आने से एनडीए के भीतर सियासी समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है।