पटना

बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ देने की मांग जोर पकड़ रही है। राजधानी पटना में कई प्रमुख स्थानों पर इस मांग से जुड़े पोस्टर दिखाई दे रहे हैं। जेडीयू के प्रदेश महासचिव छोटू सिंह ने यह मांग उठाते हुए मुख्यमंत्री को समाजवाद और विकास का प्रतीक बताया है।

राज्य कार्यकारिणी की बैठक से पहले पोस्टरबाजी
जेडीयू की राज्य कार्यकारिणी की बैठक से ठीक पहले मुख्यमंत्री आवास और पार्टी कार्यालय के आसपास इन पोस्टरों की बाढ़ आ गई है। इन पोस्टरों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ‘प्रख्यात समाजवादी और बिहार के विकास पुरुष’ के रूप में प्रस्तुत करते हुए उन्हें ‘भारत रत्न’ देने की अपील की गई है। छोटू सिंह ने कहा, “मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार को जंगलराज से निकाल कर विकास के रास्ते पर अग्रसर किया है, और उनके ऊपर कभी कोई भ्रष्टाचार का दाग नहीं लगा है।”

विपक्ष की प्रतिक्रिया, सियासत गर्म
छोटू सिंह की इस मांग ने बिहार की राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। जहां जेडीयू कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने इस कदम का स्वागत किया है, वहीं विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक स्टंट करार दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस मांग के बाद आने वाले चुनावों में यह मुद्दा प्रमुख रूप से उभरेगा।

नीतीश कुमार की उपलब्धियां
छोटू सिंह ने अपने बयान में कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था में सुधार किया, बल्कि राज्य में बिजली, सड़क और बुनियादी ढांचे को भी मजबूत किया है। उन्होंने कहा, “आज बिहार तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है और इसका श्रेय नीतीश कुमार की दूरदर्शिता और नेतृत्व को जाता है। उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करना देश के प्रति उनकी सेवाओं का सम्मान होगा।”

इस मांग के बाद बिहार में राजनीतिक तापमान बढ़ा हुआ है, और आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नीतीश कुमार को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिल सकेगा।

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