नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने हिज्ब-उत-तहरीर (HuT) और इसके संबंधित संगठनों को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। इस कदम को भारत की आंतरिक सुरक्षा और लोकतांत्रिक ढांचे की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है। गृह मंत्रालय (MHA) ने इस संबंध में एक अधिसूचना जारी कर हिज्ब-उत-तहरीर को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA) के तहत आतंकवादी संगठन करार दिया है।
गृह मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि हिज्ब-उत-तहरीर का मकसद एक इस्लामी राज्य और खलीफत की स्थापना करना है, जिसे यह संगठन भारत समेत वैश्विक स्तर पर लागू करने की कोशिश करता है। संगठन का मुख्य उद्देश्य लोकतांत्रिक सरकारों को गिराकर जिहाद और अन्य आतंकवादी गतिविधियों के जरिए इस लक्ष्य को प्राप्त करना है, जो देश की आंतरिक शांति और लोकतांत्रिक ढांचे के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि हिज्ब-उत-तहरीर युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर आतंकवादी नेटवर्क, जैसे कि आईएसआईएस, में भर्ती करने की कोशिश करता है। इसके अलावा, संगठन सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड एप्स और धार्मिक प्रचार सभाओं का उपयोग करके युवाओं को उकसाने और आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन जुटाने में भी शामिल है।
गृह मंत्रालय ने UAPA की धारा 35 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए हिज्ब-उत-तहरीर को आतंकवादी संगठन घोषित किया। यह कानून सरकार को किसी भी आतंकवादी संगठन को अवैध घोषित करने और उसके सदस्यों तथा सहयोगियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की अनुमति देता है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर कहा कि मोदी सरकार आतंकवाद के प्रति ‘शून्य सहिष्णुता’ की नीति पर कायम है। उन्होंने इस कदम को आतंकवाद के खिलाफ सरकार की मजबूत नीति का हिस्सा बताया और कहा कि इससे देश की सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी।
सरकार का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब देश में आतंकवादी समूहों द्वारा युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन जुटाने की कोशिशों पर अंकुश लगाने की जरूरत महसूस की जा रही है।