संगीत के जरिए भाईचारे का संदेश देने वाले महान मानवतावादी

वाराणसी। शहनाई के सुरों से दुनिया को मोहित करने वाले उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की 109वीं जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। संगीत के जरिए हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश देने वाले इस महान कलाकार ने पूरी जिंदगी कला को साधना और इबादत के रूप में अपनाया।

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान खुद को अल्लाह और सरस्वती का समान रूप से उपासक मानते थे। उनके लिए संगीत न धर्म में बंधा था, न ही जाति में। वे अक्सर कहा करते थे, “संगीत का कोई धर्म नहीं होता।” वाराणसी की गलियों में बसी उनकी सादगी और भक्ति भावना उनके संगीत में झलकती थी।

प्रसिद्ध फिल्म निर्माता गौतम घोष की वर्ष 1989 में बनी डॉक्यूमेंट्री “मीटिंग ए माइलस्टोन” में बिस्मिल्लाह खान की जीवन यात्रा, संगीत साधना और उनके मानवीय दृष्टिकोण को बखूबी दिखाया गया है। फिल्म में बनारस का उनके जीवन और संगीत पर पड़े प्रभाव को बारीकी से दर्शाया गया है। यह डॉक्यूमेंट्री बताती है कि जो शख्स बनारस की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आत्मा को सबसे ज्यादा दर्शाता था, वह एक मुस्लिम कलाकार था।

उनकी जयंती पर संगीत प्रेमियों ने शहनाई की मधुर धुनों के साथ उन्हें याद किया। कला प्रेमियों का मानना है कि बिस्मिल्लाह खान का संगीत आने वाली पीढ़ियों को एकता और भाईचारे का संदेश देता रहेगा।

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