नए जुलूसों पर रोक
पुलिस को अलर्ट रहने के निर्देश, विपक्ष ने दी चेतावनी

कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने इस साल रामनवमी के अवसर पर किसी भी नए जुलूस की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है। मुख्य सचिव मनोज पंत की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में सभी जिला मजिस्ट्रेटों (डीएम) और पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को निर्देश दिया गया कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाएं। हर पुलिस थाने को अलर्ट मोड में रहने का आदेश दिया गया है, ताकि उत्सव के दौरान या उसके बाद किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

पिछले वर्षों में रामनवमी के दौरान हुई हिंसा को देखते हुए प्रशासन इस बार सतर्क है। बीते सालों में कई जिलों में जुलूस के दौरान सांप्रदायिक झड़पें और हिंसक घटनाएं सामने आई थीं। इन मामलों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा की गई थी, जिसमें कई गिरफ्तारियां भी हुई थीं।

विपक्ष का हमला, लाखों श्रद्धालुओं के जुटने का दावा
सरकार के इस कदम पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि रामनवमी के अवसर पर लाखों श्रद्धालु सड़कों पर उतरेंगे। उन्होंने प्रशासन को कार्यक्रमों में बाधा डालने के खिलाफ आगाह किया। अधिकारी के बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।

चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा बंगाल में हिंदुत्व कार्ड खेलने की रणनीति पर काम कर रही है। पिछले वर्षों में रामनवमी के जुलूस अक्सर राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का मंच बने हैं। वहीं, हिंसा की आशंका को देखते हुए तृणमूल कांग्रेस सरकार इस बार किसी भी विवाद से बचना चाहती है।

अब 6 अप्रैल को होने वाले रामनवमी समारोह पर सभी की नजरें टिकी हैं। प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। देखना होगा कि यह पर्व धार्मिक स्वरूप में शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होता है या फिर राजनीतिक अखाड़ा बन जाता है।

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