अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर पीएम मोदी बोले – ‘योग हमें मैं से हम की ओर ले जाता है’
विशाखापट्टनम में तीन लाख से अधिक लोगों संग मनाया गया 11वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, प्रधानमंत्री मोदी ने योग को बताया ‘शांति और संतुलन का विराम बटन’
विशाखापट्टनम |
शनिवार सुबह जब बंगाल की खाड़ी के किनारे सूरज की पहली किरणें विशाखापट्टनम के तट को छू रही थीं, तभी वहां की शांति को तोड़ते हुए हजारों लोगों की सामूहिक साँसों की ध्वनि सुनाई दी। सफेद परिधान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस विराट दृश्य का हिस्सा बने और करीब तीन लाख से अधिक लोगों के साथ योग करते नजर आए। अवसर था 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का, जिसका मुख्य आयोजन इस वर्ष आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस आयोजन में ‘कॉमन योगा प्रोटोकॉल’ का नेतृत्व किया, जिसे देशभर में आयुष मंत्रालय के ‘योग संगम’ अभियान के तहत मनाया जा रहा है। यह आयोजन देश का सबसे बड़ा योग सत्र बना, जिसमें लगभग 12 लाख स्थानों पर एक साथ योग किया गया।
प्रधानमंत्री ने कहा, “आज जब दुनिया कई तरह की उथल-पुथल, अस्थिरता और तनाव से जूझ रही है, तब योग मानवता के लिए एक विराम बटन की तरह है, जो शांति, संतुलन और सम्पूर्णता की राह दिखाता है।”
‘योग: मैं से हम तक की यात्रा’
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने योग को केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि एक आत्मिक और सामाजिक यात्रा बताया। उन्होंने कहा, “योग हमें अपने से बाहर निकलकर सम्पूर्ण सृष्टि से जोड़ता है। यह हमें यह सिखाता है कि हम अकेले नहीं, प्रकृति के अंग हैं।”
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम थी – ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’, जिस पर प्रधानमंत्री ने विशेष जोर देते हुए कहा, “हमारा स्वास्थ्य मिट्टी, जल, पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों से जुड़ा हुआ है। योग इस पारिस्थितिक और भावनात्मक संतुलन को समझने का माध्यम है।”
संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव से वैश्विक आंदोलन तक
प्रधानमंत्री मोदी ने याद दिलाया कि एक दशक पहले जब भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित करने का प्रस्ताव रखा था, तब 175 देशों ने इसका समर्थन किया था। “आज यह दिन 175 से अधिक देशों में मनाया जा रहा है, यह भारत की सांस्कृतिक विरासत की वैश्विक स्वीकृति का प्रतीक है,” उन्होंने कहा।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने की मोदी की सराहना
आयोजन में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने योग को वैश्विक मंच पर पहुंचाया और इसे एक वेलनेस मूवमेंट में बदल दिया। यह उनकी दूरदर्शिता का परिणाम है कि आज योग एक अंतरराष्ट्रीय उत्सव बन चुका है।”
नायडू ने जानकारी दी कि इस बार योग दिवस 12 लाख से अधिक स्थानों पर मनाया गया, जिसमें 10 करोड़ से अधिक लोगों ने भाग लिया।
जनसामान्य की व्यापक भागीदारी
इस भव्य आयोजन में स्कूलों के छात्र, स्थानीय नागरिक, सरकारी अधिकारी, योग प्रशिक्षक और सांस्कृतिक कलाकारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने विशाखापट्टनम के तट पर एकजुट होकर योगाभ्यास किया और विश्व को भारत के सांस्कृतिक और स्वास्थ्य दर्शन का संदेश दिया