बिहार की बेटियों को सरकारी नौकरी में मिलेगा 35% आरक्षण, सिर्फ मूल निवासी महिलाओं को ही लाभ
कैबिनेट की बैठक में नीतीश सरकार का बड़ा फैसला, दूसरे राज्यों की महिलाएं रहेंगी वंचित

पटना, 8 जुलाई।
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की महिलाओं को एक बड़ी सौगात दी है। मंगलवार को आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में एक अहम निर्णय लेते हुए सरकार ने सभी सरकारी सेवाओं में सीधी नियुक्तियों के अंतर्गत केवल बिहार की मूल निवासी महिलाओं को 35 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने की घोषणा की। इस फैसले को महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार की बड़ी पहल माना जा रहा है।

करीब एक घंटे तक चली इस बैठक में कई अन्य विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ, परंतु महिलाओं के डोमिसाइल आधारित आरक्षण का निर्णय सबसे अहम और दूरगामी प्रभाव वाला साबित हो सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह आरक्षण सिर्फ उन्हीं महिलाओं को मिलेगा जो बिहार की स्थायी निवासी होंगी। दूसरे राज्यों की महिला अभ्यर्थियों को इस नीति के तहत लाभ नहीं मिलेगा।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बैठक के बाद अपने संबोधन में कहा, “बिहार की महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित की है। उन्हें और अधिक अवसर देने की आवश्यकता है ताकि वे प्रशासनिक तंत्र में भागीदारी सुनिश्चित कर सकें। यही सोचकर यह कदम उठाया गया है।”

गौरतलब है कि इससे पहले भी राज्य सरकार ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और सेवाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था की थी, लेकिन अब इसे कानूनी रूप से और अधिक स्पष्ट करते हुए केवल मूल निवासी महिलाओं तक सीमित कर दिया गया है। यह फैसला न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाएगा बल्कि राज्य की महिलाओं के आत्मविश्वास और सामाजिक भागीदारी को भी मजबूती देगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से बिहार की युवतियों को सरकारी नौकरियों में प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी, वहीं यह फैसला आने वाले विधानसभा चुनावों में भी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

मुख्य बिंदु:

  • बिहार की मूल निवासी महिलाओं को मिलेगा 35% क्षैतिज आरक्षण
  • सभी सरकारी सेवाओं में सीधी नियुक्तियों पर लागू होगा यह नियम
  • दूसरे राज्यों की महिलाएं इस लाभ से रहेंगी वंचित
  • महिला सशक्तिकरण को लेकर सरकार की दिशा और नीयत दोनों स्पष्ट

इस निर्णय के बाद राज्य भर में छात्राओं और महिला अभ्यर्थियों में उत्साह का माहौल है। अब देखना होगा कि इस फैसले का जमीनी स्तर पर कितना असर पड़ता है और यह किस हद तक महिलाओं को सरकारी तंत्र में प्रतिनिधित्व दिला पाता है।

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