तेजस्वी यादव का विधानसभा में तीखा सवाल: SIR के नाम पर वोटर लिस्ट से न हटे किसी बिहारी का नाम
CM नीतीश से की मांग, बोले– हर नागरिक का वोट देने का हक़ है संवैधानिक अधिकार
पटना। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने विशेष पुनरीक्षण अभियान (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की। तेजस्वी ने आशंका जताई कि इस प्रक्रिया के तहत राज्य के वास्तविक नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा सकते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से स्पष्ट मांग की कि यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी वास्तविक बिहारी का नाम मतदाता सूची से न काटा जाए।
तेजस्वी ने कहा, “हम मुख्यमंत्री जी से आग्रह करते हैं कि इस संवेदनशील मुद्दे को गंभीरता से लें। हर बिहारी को वोट देने का अधिकार है और इसे सुरक्षित रखा जाना चाहिए। SIR की आड़ में यदि किसी नागरिक का नाम हटता है तो यह संविधान का उल्लंघन होगा।”
“25 दिन में 8.5 करोड़ वोटरों तक कैसे पहुंच गए BLO?”
विधानसभा में अपनी बात रखते हुए तेजस्वी ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब जातिगत जनगणना में 9 से 10 महीने लगे और कई बीजेपी नेताओं ने यह दावा किया कि उनके घर तक कोई नहीं पहुंचा, तो महज 25 दिनों में आठ करोड़ से ज्यादा मतदाताओं तक BLO कैसे पहुंच गए?
उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे में घुसपैठियों का कोई जिक्र नहीं किया। अगर कोई घुसपैठिया राज्य में घुसा है, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की बनती है। हम केवल यह चाहते हैं कि किसी भी सच्चे बिहारी का नाम वोटर लिस्ट से न हटे।”
तेजस्वी ने यह भी जोड़ा कि इस मुद्दे पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने भी उनका समर्थन किया है। उन्होंने इसे केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा प्रश्न बताया।
बीते दिन की कार्यवाही को लेकर जताया अफसोस
तेजस्वी यादव ने मंगलवार को सदन में हुई घटनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि विपक्ष जनहित के मुद्दों पर बात करना चाहता है, लेकिन उन्हें रोका गया। उन्होंने स्पीकर से अपील करते हुए कहा, “कल की चर्चा अधूरी रह गई थी, उसे पूरा करने का अवसर हमें मिलना चाहिए। अगर बीते पांच वर्षों में हमसे कोई गलती हुई हो तो हम क्षमा चाहते हैं। लेकिन जो घटना हुई, उसके लिए दोनों पक्षों को माफी मांगनी चाहिए। अगली बार कौन इस सदन में होगा, यह कोई नहीं जानता।”
सदन में गरमा-गरम माहौल
तेजस्वी की इस मांग के बाद सत्तापक्ष की ओर से हालांकि कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया गया, लेकिन विपक्ष के तेवर से यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्मा सकता है। विधानसभा सत्र में SIR प्रक्रिया, मतदाता सूची की पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों को लेकर गहन बहस की संभावना जताई जा रही है।