1971 युद्ध के वीर वायुयोद्धा ग्रुप कैप्टन डी.के. परुलकर का निधन
अमर शर्मा

नई दिल्ली/पुणे – भारतीय वायुसेना के साहस और गौरव का प्रतीक बने 1971 युद्ध के नायक, ग्रुप कैप्टन (सेवानिवृत्त) डी.के. परुलकर, वीएम, वीएसएम का निधन हो गया। वे महाराष्ट्र के पुणे के निकट अपने निवास पर अंतिम सांस ली।

भारतीय वायुसेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा – “1971 युद्ध के वीर, जिन्होंने पाकिस्तान में कैद से साहसिक भागने का नेतृत्व किया और अद्वितीय साहस, सूझबूझ तथा भारतीय वायुसेना पर गर्व का परिचय दिया — वे अब स्वर्ग सिधार गए हैं। वायुसेना का हर योद्धा उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है।”

शौर्य की मिसाल बने परुलकर
मार्च 1963 में वायुसेना में कमीशन प्राप्त करने वाले परुलकर ने अपने करियर में कई अहम पदों पर सेवाएं दीं, जिनमें एयर फोर्स अकादमी में फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर की जिम्मेदारी भी शामिल थी। 1965 के भारत-पाक युद्ध में उनका विमान दुश्मन की गोलाबारी से क्षतिग्रस्त हुआ और वे कंधे में घायल हो गए। इसके बावजूद, वरिष्ठ की इजेक्ट करने की सलाह ठुकराते हुए उन्होंने क्षतिग्रस्त विमान को सुरक्षित बेस पर उतारा। इस वीरता के लिए उन्हें ‘वायु सेना मेडल’ से सम्मानित किया गया।

1971 में कैद से वीरतापूर्ण पलायन
1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान, उस समय विंग कमांडर रहे परुलकर पाकिस्तान में युद्धबंदी बनाए गए। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने राष्ट्र और वायुसेना के प्रति अद्वितीय गर्व और साहस का परिचय दिया। उन्होंने युद्धबंदी शिविर से दो साथियों के साथ मिलकर साहसिक पलायन का नेतृत्व किया, जो भारतीय सैन्य इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है।

सेवाकाल के दौरान उन्हें ‘विशिष्ट सेवा मेडल’ (वीएसएम) से भी अलंकृत किया गया। उनके निधन से देश ने एक ऐसा वीर सपूत खो दिया है, जिसकी शौर्यगाथा आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।

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