मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप पर अड़े राहुल, चुनाव आयोग ने दोहराई चुनौती – सबूत दें या माफी मांगें

नई दिल्ली – मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी के मामले पर चुनाव आयोग और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) और हरियाणा सीईओ के नोटिस के बाद आयोग ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि राहुल गांधी के पास अब भी दो विकल्प हैं – या तो अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेज पेश करें, या फिर देश से माफी मांगें।

कर्नाटक सीईओ की चेतावनी
10 अगस्त को जारी पत्र में कर्नाटक के सीईओ ने राहुल गांधी को याद दिलाया कि उन्होंने 7 अगस्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस में “वोट चोरी” के आरोप लगाते हुए दावा किया था कि उनके पास चुनाव आयोग के रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं। राहुल ने आरोप लगाया था कि महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में एक मतदाता, शकुन रानी, ने दो बार मतदान किया, और यह जानकारी एक पोलिंग अधिकारी द्वारा दिखाई गई सूची से मिली।

प्रारंभिक जांच में शकुन रानी ने दो बार मतदान करने से इनकार कर दिया, जबकि राहुल द्वारा दिखाई गई टिक-मार्क वाली सूची पोलिंग अधिकारी द्वारा जारी नहीं पाई गई। इससे दस्तावेज की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हो गए।

100,250 वोट चोरी का दावा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कहा था कि कांग्रेस ने कर्नाटक में 16 लोकसभा सीट जीतने की उम्मीद की थी, लेकिन सिर्फ 9 सीटें मिलीं। सात अप्रत्याशित हार की जांच में महादेवपुरा क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित किया गया, जहां कथित रूप से 1,00,250 वोट चोरी हुए।

उन्होंने आरोप लगाया कि वोट चोरी पांच तरीकों से हुई – डुप्लीकेट वोटर, फर्जी और अमान्य पते, और एक ही पते पर बड़ी संख्या में पंजीकरण, जहां वास्तविकता में 50–60 लोगों के नाम दर्ज थे लेकिन मौके पर केवल एक परिवार रहता था।

आयोग का दो टूक रुख
चुनाव आयोग ने कहा कि यदि राहुल गांधी के पास आरोपों के समर्थन में प्रमाण हैं तो उन्हें नियमों के अनुसार लिखित घोषणा देनी चाहिए, अन्यथा “झूठे आरोप” लगाने के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए। आयोग का कहना है कि आरोप गंभीर हैं और बिना सबूत के इस तरह का दावा चुनावी प्रक्रिया की साख को नुकसान पहुंचा सकता है।

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